झारखंड की पहली आठ लेन सड़क के नामकरण को लेकर तकरार,भाजपा और झामुमो पढ़िए कैसे ठोक रहे ताल 

    झारखंड की पहली आठ लेन सड़क के नामकरण को लेकर तकरार,भाजपा और झामुमो पढ़िए कैसे ठोक रहे ताल 

    धनबाद(DHANBAD): झारखंड की पहली आठ लेन सड़क के नाम को लेकर धनबाद में राजनीति तेज हो गई है. भाजपा और झारखंड मुक्ति मोर्चा आमने सामने है. प्रदेश की पहली आठ लेन सड़क अब महीने दो महीने में हैंड ओवर होने वाली है. 20 किलोमीटर लंबी सड़क वर्ल्ड बैंक की मदद से बन रही है. सड़क अभी पूरी नहीं हुई है लेकिन उसके नाम को लेकर राजनीति शुरू हो गई है. भाजपा और झारखंड मुक्ति मोर्चा ने शनिवार को अलग-अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अलग-अलग नाम सुझाए और दावा किया कि उनकी बात सरकार सुने. देखना दिलचस्प होगा कि  आखिर निर्णय क्या होता है.

    अटल मार्ग के नाम का बोर्ड लगाकर दी जाए श्रद्धांजलि 

    शनिवार को सर्किट हाउस में पूर्व मेयर शेखर अग्रवाल ने कहा कि 2018 में ही पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई के निधन के बाद रघुवर सरकार ने 10 योजनाओं को उनके नाम से नामित किया था. 24 अगस्त को इसे कैबिनेट से पास किया गया. उनकी मांग है कि अटल मार्ग के नाम का बोर्ड लगाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी जाए.आगे कहा कि बिहार, झारखंड में नगर निकाय की यह  पहली सड़क है. वर्ल्ड बैंक के प्रावधान के अनुसार 286 गरीब लोगों को ₹7 करोड़ का मुआवजा दिया गया. 15 मंदिर और सरकारी भवन के लिए एक करोड़ दिए गए. यानी इस आठ लेन सड़क बनाने में किसी की आह नहीं ली गई. जब 2019 में रघुवर सरकार अपदस्थ हुई तो झामुमो सरकार ने काम रुकवा दिया.

    8 लेन  सड़क का नाम बिरसा मुंडा के नाम होना चाहिए: नीलम मिश्रा

    इधर ,झारखंड मुक्ति मोर्चा ,सेंट्रल कमेटी सदस्य डॉक्टर नीलम मिश्रा ने कहा कि 8 लेन  सड़क का नाम बिरसा मुंडा के नाम होना चाहिए. उन्होंने सड़क के निर्माण में देरी का आरोप लगाया. कहा कि जानबूझकर ऐस्टीमेटेड अमाउंट को बढ़ाकर 332 करोड से 410 करोड किया गया. डॉक्टर नीलम मिश्रा ने कहा कि झारखंड राज्य में किसी एक व्यक्ति विशेष का योगदान नहीं होकर शहीदों के प्रयास का प्रतिफल है. उन्होंने कहा कि अटल बिहारी बाजपेई निश्चित रूप से सर्वमान्य नेता है. उनके प्रति सबके मन में सम्मान है लेकिन झारखंड में बनी इस पहली आठ लेन सड़क का नाम बिरसा मुंडा के नाम होना चाहिए. जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, सभी राजनीतिक दल क्रेडिट लेने के लिए दावा प्रस्तुत कर रहे हैं.

    सड़क के नाम पर राजनीति शुरू 

    यह बात सही है कि धनबाद को आठ लेन सड़क के रूप में एक तोहफा मिला है. लेकिन इसके नाम को लेकर फिलहाल राजनीति है .देखना है यह राजनीति कहां जाकर रूकती है. वैसे भी धनबाद के पाटलिपुत्र मेडिकल कॉलेज का नाम बदलकर झारखंड सरकार ने शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज कर दिया था. झारखंड मुक्ति मोर्चा प्रदेश में जहां सत्ता में है तो भाजपा विपक्ष में बैठी है. दोनों दलों में राजनीतिक तकरार होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है.

    रिपोर्ट धनबाद ब्यूरो


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