Coal India: नया साल कोयला उद्योग में क्यों लेकर आया हलचल,कोयला वेतन समझौता पर क्यों गहराने लगे संकट के बादल!


धनबाद: नए साल में कोयला उद्योग में हलचल है. हलचल कोयला वेतन समझौते को लेकर है. दरअसल ,कोयला वेतन समझौते की अवधि इसी साल 30 जून को खत्म हो रही है .1 जुलाई से नए कोयला वेतन समझौता 12 की अवधि शुरू हो जाएगी .
इधर, चार लेबर कोड लागू हो गया है .अब आगे कोयला वेतन समझौता का तौर, तरीका क्या होगा, इसको लेकर असमंजस की स्थिति कम से कम कोयला मजदूरों और ट्रेड यूनियन नेताओं में बढ़ती जा रही है. जानकारी के अनुसार चार लेबर कोड में औद्योगिक संबंध और प्रबंधन एवं यूनियन के बीच वार्ता का जो प्रावधान है ,वह जेबीसीसीआई से अलग है. यही वजह है कि संशय बढ़ रही है.
कोयला वेतन समझौता की अवधि 1 जुलाई 2021 से लेकर 30 जून 2026 तक है. मैनपावर की संख्या भी घट रही है. 2021 में कोल इंडिया और उसकी सहायक कंपनियों में कुल कर्मियों की संख्या 2,59,016 थी. 5 साल बाद कोयला वेतन समझौते 11 की अवधि खत्म हो रही है. इधर, नवंबर 2024 में कोयला कर्मियों की संख्या 2,14,909 रह गई है. जिसमे 15 000 अधिकारी संवर्ग के हैं.
अगर कोयला वेतन समझौता होगा भी तो 2 लाख से कुछ कम कोयला कर्मियों के लिए होगा. कोयला वेतन समझौते से कोयला कर्मियों को लाभ मिलता है. कोयला वेतन समझौते की ओर कोयला कर्मियों की टकटकी लगी रहती है. अब चुकी चार लेबर कोड लागू हो गया है, तो कोयला वेतन समझौता होगा भी अथवा नहीं, होगा भी तो इसका तौर तरीका क्या होगा, इस पर अभी से मंथन शुरू हो गया है. असमंजस की स्थिति बढ़ रही है. आशंकाएं भी बढ़ रही है.
दरअसल ,कोयला उद्योग के राष्ट्रीयकरण के समय कोयला कर्मियों की सुख सुविधा के जो प्रावधान किए गए थे ,उसमें कहीं ना कहीं कटौती की जा रही है. कोयला उत्पादन लगभग आउटसोर्स के भरोसे चला गया है. कोयला उद्योग में प्राइवेट प्लेयर्स हावी हो रहे हैं. ऐसे में जो कोयल कर्मी बच गए हैं, उनके वेतन समझौता के तरीके को लेकर मजदूर संगठन के लोग भी असमंजस में हैं. देखना होगा कि आगे होता क्या है. अगर कोयला वेतन समझौता को स्वरूप बदला तो मजदूर संगठनों के अस्तित्व पर भी संकट पैदा हो जाएगा. इसमें किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए.
रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो
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