COAL INDIA: प्रोडक्शन पंहुचा 775 मिलियन टन लेकिन सुरक्षा बजट के खर्च में फिसड्डी क्यों ?

    COAL INDIA: प्रोडक्शन पंहुचा 775 मिलियन टन लेकिन सुरक्षा बजट के खर्च में फिसड्डी क्यों ?

    धनबाद(DHANBAD):  यह बात सच है कि कोल इंडिया का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है. देश ही नहीं, बल्कि विदेश की भी सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड अब 50 साल की हो गई है. पहली  नवंबर" 2024 को इस कंपनी के गठन के 50 साल पूरे हो गए है.  इस कंपनी को महारत्न कोयला कंपनी का भी दर्जा प्राप्त है.  1975 में, जहां कोल इंडिया का उत्पादन लगभग 90 मिलियन टन था. वहीं 2024 में इस कंपनी का उत्पादन 775 मिलियन टन  के करीब पहुंच गया है. कोल इंडिया से उत्पादित कोयले की आपूर्ति कोयला आधारित बिजली संयंत्र को 80% के लगभग होती है. यह अलग बात है कि कोल इंडिया का उत्पादन कई गुना अधिक हो गया है. लेकिन कोयला उद्योगों के सुरक्षा मानक पर कंपनियां कितनी खरी है ,यह सवाल समय -समय पर उठता रहा है. एक आंकड़ा निकल कर आया है.  

    उस पर अगर गौर किया जाए, तो पता चलता है कि देश की कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया की अनुषंगी  ईकाइयां सुरक्षा पर बहुत ध्यान नहीं देती है.  शायद यही वजह है की दुर्घटनाएं भी होती है.  कोल इंडिया की दो अनुषंगी  ईकाइयां बीसीसीएल और ईसीएल  में चालू वित्तीय  वर्ष में अपने आवंटित सुरक्षा बजट के उपयोग में पीछे चल रही है.  चालू वित्तीय वर्ष 2024 -25 के आंकड़ों पर गौर करें, तो ईसीएल  ने अपने सुरक्षा बजट का सबसे कम 21.85 प्रतिशत राशि खर्च कर पाई  है.  जबकि कोल इंडिया की सबसे बड़ी अनुषंगी  ईकाई बीसीसीएल 67.65% आवंटित सुरक्षा राशि खर्च कर पाई है.  सीसीएल 69.27% राशि खर्च कर चुकी है.  एनसीएल  71. 69% खर्च कर सबसे ऊपर चल रही है.

    बता दे कि 27 दिसम्बर "1975 को देश की सबसे बडी़ खान दुर्घटना धनबाद चासनाला में हुई थी.  सरकारी आँकडों के अनुसार लगभग 375 लोग मारे गये थे.  कोल इंडिया के अंतर्गत आनेवाली भारत कोकिंग कोल लिमिटेड की चासनाला कोलियरी केपिट संख्या 1 और 2 के ठीक ऊपर स्थित एक बडे़ जलागार (तलाब) में जमा करीब पाँच करोड़ गैलन पानी, खदान की छत को तोड़ता हुआ अचानक अंदर घुस गया था.  इस प्रलयकारी  बाढ़ में वहां काम करे, सभी लोग फँस गये थे.  आनन-फानन में मंगाये गये पानी निकालने वाले पम्प छोटे पड़  गए. कोलकाता  स्थित विभिन्न प्राइवेट कंपनियों से संपर्क साधा गया, तब तक काफीं समय बीत गया, फँसें लोगों को निकाला नहीं जा सका था. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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