सीएमडी साहब-गजलीटांड़ हादसे की पुनरावृत्ति का क्यों हो रहा इंतजार !

    सीएमडी साहब-गजलीटांड़ हादसे की पुनरावृत्ति का क्यों हो रहा इंतजार !

    धनबाद(DHANBAD) : झरिया के इस हाल को जरूर देखिए-केंद्रीय कोयला मंत्री जी. कोल इंडिया के अध्यक्ष भी देखें और बीसीसीएल के सीएमडी भी. अगर इसके बाद भी अनदेखी की गई तो कहा जा सकता है कि कोयलांचल में समाधि स्थल की संख्या इतनी अधिक हो जाएगी कि उंगली पर गिनना भी मुश्किल हो जाएगा. झरिया के बस्ताकोला क्षेत्र के राजापुर ओपन कास्ट प्रोजेक्ट में शुक्रवार की सुबह 5 बजे लैंड स्लाइडिंग की घटना ने गाजलीटांड़ हादसे की घटना की यादों को ताजा कर दिया है. जानकारी के अनुसार बगल की बंद भूमिगत खदान की गैलरी का बांध टूटने से पानी का दबाव इतना बढ़ गया कि लगभग 1000 फीट ऊंचा और 500 फीट चौड़ा आकार का ओवर बर्डेन पलक झपकते ही भरभरा कर गिर पड़ा. घटना के समय जो ठेका कर्मी  वहां मौजूद थे, उनकी जान तो बच गई, लेकिन इस घटना ने पूरे इलाके को दहलाकर रख दिया है. 

    26 सितंबर" 1995 की रात कतरास की कतरी नदी का पानी बांध को तोड़कर खदान में प्रवेश कर गया था.  इसमें कम से कम 64  श्रमिकों की जल समाधि हो गई थी. इस साल भी 26 सितंबर को उनकी समाधि स्थल पर बीसीसीएल के अधिकारी सहित राजनेता जाकर श्रद्धांजलि अर्पित किये. लैंडस्लाइड की घटना के बाद धुंवा और गैस का गुब्बारा पूरे इलाके में फैल गया. कहा तो यह भी जाता है कि यह गुब्बारा धनबाद शहर को भी अपनी आगोश में ले लिया था. धनबाद के बैंक मोड में रहने वाले लोग भी बताते हैं कि रोज सुबह-सुबह वायुमंडल में प्रदूषण का प्रभाव रहता है. लैंड स्लाइडिंग की घटना के बाद प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जब तक वह कुछ समझ पाते, तब तक कोयला फेस से पानी का तेज बहाव शुरू हो चुका था. 

    सूत्रों के अनुसार राजापुर परियोजना कोयला फेस को दो हिस्से में बांटकर कोयल का उत्पादन किया जाता है. प्रबंधन एक हिस्से में जमा पानी को पंप कर दूसरे हिस्से में जमा करता है. उसके बाद जमा पानी को फायर फाइटिंग के साथ क्षेत्र के लोगों की जरूरत को पूरा करने के लिए दिया जाता है. अधिक मात्रा में पानी जमा होने पर अतिरिक्त पंप के माध्यम से पानी की निकासी परियोजना से बाहर कर दी जाती है. अंडरग्राउंड या बरसाती पानी की निकासी के लिए फेस में करीब आधा दर्जन पंप लगे हुए थे. शुक्रवार को लैंड स्लाइडिंग के बाद गैलरी से निकलने वाले पानी से दोनों हिस्से डूब गए. गनीमत रही की जान माल की क्षति नहीं हुई, लेकिन तेज आवाज के साथ उठे  धूल कण के गुब्बारे से झरिया से लेकर धनबाद के लोग परेशान रहे. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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