शहर की सरकार: दुमका में जलापूर्ति योजना पर मचा सियासी घमासान

    शहर की सरकार: दुमका में जलापूर्ति योजना पर मचा सियासी घमासान

    दुमका(DUMKA):झारखंड में नगर निकाय चुनाव की प्रक्रिया तेज होते ही राजनीतिक माहौल गरमा गया है. प्रत्याशी घर घर जाकर मतदाताओं को साधने में जुटे है, वहीं मंचों और मीडिया में एक दूसरे पर तीखे शब्दबाण भी चल रहे है.चुनावी मौसम में कौन सा मुद्दा अचानक केंद्र में आ जाए, कहना मुश्किल होता है. इस बार शहरी जलापूर्ति योजना सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बन गया है.

    लगभग दशक पुरानी योजना पर मचा सियासी घमासान

    उपराजधानी दुमका में नगर परिषद चुनाव के बीच करीब एक दशक पहले शुरू हुई शहरी जलापूर्ति योजना चर्चा के केंद्र में है.अध्यक्ष पद के उम्मीदवार इसी मुद्दे के सहारे एक दूसरे को घेर रहे है. जनता भी यह जानना चाहती है कि आखिर इतनी बड़ी योजना के बावजूद पानी को लेकर सवाल क्यों खड़े हो रहे है.

    रखरखाव खर्च में भारी अंतर बना विवाद की जड़

    जानकारी के अनुसार वर्ष 2012-13 में योजना शुरू होने पर इसके रखरखाव के लिए लगभग 1 करोड़ 44 लाख रुपये वार्षिक पर एक कंपनी को जिम्मेदारी दी गई थी.वर्तमान में दूसरी एजेंसी लगभग 77 लाख रुपये में यह कार्य कर रही है. खर्च में इस बड़े अंतर को लेकर ही आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया है और तीन प्रमुख उम्मीदवार आमने सामने है.

    अजय झा का बयान : जनता के पैसे की बचत की

    निवर्तमान अध्यक्ष श्वेता झा के पति और इस बार स्वयं उम्मीदवार बने अजय झा ने दावा किया कि उनकी पत्नी श्वेता झा के कार्यकाल में रखरखाव खर्च घटाकर जनता के पैसे की बर्बादी रोकी गई. उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व अध्यक्ष ने वर्षों तक एक ही एजेंसी को काम देकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया.मेंटेनेंस खर्च पहले 1 करोड़ 44 लाख रुपये था, जिसे श्वेता झा के कार्यकाल में घटाकर लगभग 70 लाख रुपये किया गया. इस बयान को राजनीतिक तौर पर एक तीर से दो निशाना माना जा रहा है.

    अमिता रक्षित का पलटवार: टेंडर सरकार तय करती है

    भाजपा समर्थित उम्मीदवार और दो बार की अध्यक्ष अमिता रक्षित ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि टेंडर प्रक्रिया सरकार के स्तर पर होती है, अध्यक्ष के स्तर पर नहीं.उन्होंने यह भी कहा कि मेंटेनेंस खर्च कम कर देने से व्यवस्था ठीक नहीं है और लोगों को शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा, जो असली समस्या है.

    विनोद कुमार लाल ने खोला मोर्चा, लगाए गंभीर आरोप

    दोनों कार्यकाल में उपाध्यक्ष रह चुके और अब अध्यक्ष पद के उम्मीदवार विनोद कुमार लाल ने भी विवाद को हवा दी. उनका कहना है कि उपाध्यक्ष का पद सीमित अधिकार वाला होता है और विरोध करने पर उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था.उन्होंने पूर्व अध्यक्ष अमिता रक्षित पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी लगाए.

    आरोप पर तीखी प्रतिक्रिया: धृतराष्ट्र तक कह डाला

    विनोद लाल के आरोप पर अमिता रक्षित ने पलटवार करते हुए उन्हें धृतराष्ट्र तक कह दिया.इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी और तीखी हो गई है तथा चुनावी माहौल और भी गर्म हो गया है.

    दावे प्रतिदावे के बीच असली फैसला जनता के हाथ

    नगर निकाय चुनाव में शहरी जलापूर्ति योजना अब सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बन चुकी है.उम्मीदवार एक दूसरे पर भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के आरोप लगा रहे हैं, जबकि जनता बेहतर और साफ पानी की उम्मीद में है.दावों और प्रतिदावों के बीच अंतिम फैसला मतदाताओं को ही करना है, क्योंकि आखिरकार “यह पब्लिक है, सब जानती है.

    रिपोर्ट-पंचम झा


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