झरिया में रैली निकल कर बच्चो ने कहा - "बचपन बचाओ, बाल श्रम हटाओ

    झरिया में रैली निकल कर बच्चो ने कहा - "बचपन बचाओ, बाल श्रम हटाओ

    धनबाद(DHANBAD):   विश्व बाल श्रम विरोधी दिवस (12 जून 2024) के अवसर पर बुधवार को झरिया स्थित सामाजिक परियोजना ने झरिया के कोयला क्षेत्रों में चल रही बाल मजदूरी जैसी  गंभीर समस्या को  ले कर एक  रैली निकाल कर फिर से  मुद्दे को जीवंत किया है. झरिया के  शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता  पिनाकी राय के नेतृत्व में 55-60  बच्चों ने "बचपन बचाओ, बाल श्रम हटाओ" अभियान में भाग लिया.   यह रैली दीपु धौड़ा  कोलियरी, कुजामा कोलियरी, लोदना कोलियरी , लिलोरीपथरा के इलाके में घूमकर झरिया के हेटलीबांध  में समाप्त हुई.  बच्चों के हाथ में तख्तियों थी, जिस पर  पर लिखा था कि ,- "रॉकेट साइंस के युग में बच्चों को कोयला खदानों में  क्यों मजदूरी करनी  पड़ती  है" ? ये भी लिखा था कि,"बच्चे इस उम्र में सीखने के लिए पैदा होते हैं, कमाने के लिए नहीं",  'बच्चे देश की संपत्ति हैं, बोझ नहीं',  सही  'नियमों का पालन करो और बाल श्रम बंद करो'   रैली में शामिल बच्चों ने हाथ में हाथ डाल कर सभी को बाल मज़दूरी के  खिलाफ जागरूकता पैदा करने का संकल्प लिया. 

      रैली के 4-5 किलोमीटर लंबे रास्ते में लगातार नारे लगाते हुए लोगों को जागरूक किया.  सीआईएसएफ के जवान साथ में  फोटो भी खिचवाये.   कोलफील्ड चिल्ड्रन क्लासेज के  बच्चों में कुछ बच्चे कोयला क्षेत्रों में भी बाल श्रम करते है.   कक्षा 10 पास छात्रा सुहानी कुमारी और नंदिनी कुमारी ने बताया कि - 'हमें काम करना पसंद नहीं है, हम पढ़ना चाहते हैं, लेकिन हालात ने हमें पैसे के लिए काम करने पर मजबूर कर दिया है.  अगर सरकार की ओर से कोई योजना है, तो हम काम नहीं करेंगे.  हम रैली में शामिल हुए हैं, क्योंकि हम नहीं चाहते कि दूसरे बच्चे कोयले में  काम करे. 'कोलफील्ड चिल्ड्रन क्लासेज के संस्थापक  पिनाकी रॉय ने कहा कि  "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि झरिया कोलफील्ड्स में अभी भी हजारों से अधिक बच्चे बाल श्रम के रूप में काम कर रहे हैं, कई प्रतिभाएं आधी-अधूरी अवस्था में ही नष्ट हो रही है.  समाज से बाल श्रम को हटाना अब हमारे देश का प्रमुख एजेंडा होना चाहिए.  एक तरफ हमारा  देश अंतरिक्ष विज्ञान और इंजीनियरिंग में इतना प्रगतिशील है, वहीं हमें सामाजिक इंजीनियरिंग में भी प्रगति की आवश्यकता है. "
     

    रैली में पिनाकी रॉय और शिक्षक सह कलाकार संजय पंडित के अलावा केंदुआ से सुमन कुमारी, सावित्री कुमारी, सुहानी कुमारी, अंजली कुमारी, दुर्गा कुमारी, राधिका कुमारी, नंदिनी कुमारी, नीलम कुमारी, प्रेम कुमार, आदित्य कुमार आदि तथा झरिया से सोनू कुमार, रिंकी कुमारी, पंकज कुमार, अभिषेक कुमनार, संजना कुमारी, दीपशिखा कुमारी, रागिनी कुमारी, नंदिनी झा, अंजनी कुमारी आदि और दीपूधौरा से सिमरन कुमारी, सनी कुंमार, पायल कुमारी, कोनमल कुमारी, नयना कुमारी, गायत्री कुमारी, मोनू कुमार, अमन कुमार, जिगर कुमार, रोशनी कुमारी आदि शामिल थे. 


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