छुट्टी की घंटी बजने तक जिंदगी और मौत के साए में जी रहे हैं बच्चे, जानिए क्या है मामला

    छुट्टी की घंटी बजने तक जिंदगी और मौत के साए में जी रहे हैं बच्चे, जानिए क्या है मामला

    दुमका (DUMKA): गरीबों के लिए मुसीबत की कमी नहीं होती. परिवार का पुरुष दिन पर मेहनत-मजदूरी कर के सदस्यों का भरण-पोषण करता है, तो घर की महिला कम संसाधनों में सभी को खुश करने की जद्दोजहद में लगी रहती है. वहीं बच्चे सरकारी स्कूल की मार झेल रहे होते हैं. इन्हें न घर में सभी सुविधा मिल पाती है और न ही स्कूल में. जरमुंडी प्रखंड के मध्य विद्यालय हथनंगा में पढ़ने वाले गरीब बच्चों की तो जिंदगी तक पर आफत है. यहां पढ़ रहे 212 छात्रों का भविष्य भगवान के रहमो करमो पर टिका हुआ है. भवन निर्माण अभियंता जर्जर भवन में अध्ययन और अध्यापन की मनाही किए जाने के बावजूद पठन-पाठन का काम बदस्तूर जारी है. रोज खतरे के साए में पढ़ने और पढ़ाने को मजबूर छात्र और शिक्षक छुट्टी की घंटी बजने तक जिंदगी और मौत के बीच पेंडुलम की तरह लटके रहते हैं. बरसात के मौसम में स्कूल की छत से पानी टपकना कंक्रीट का गिरना इस स्कूल की नियति बन चुका है. दरवाजा और खिड़की टूटे रहने के कारण शाम ढलते ही स्कूल शराबियों का अड्डा बन जाता है. जिसके कारण यहां पढ़ने वाले छात्रों को शराबियों द्वारा छोड़े गए बोतलों को रोज उठा कर फेंकना पड़ता है.

    शिक्षा विभाग बनी संवेदनहीन

    बता दें कि साल 2018 में इस विद्यालय की दो छात्रा की बगल के पोखर में डूबने से मौत हो गई थी. इस घटना के बाद विभागीय कारवाई के तौर पर आनन-फानन में सभी शिक्षकों का तबादला कर दिया गया. इंजीनियरों ने बिल्डिंग की खस्ता हालत देखते हुए पठन-पाठन बंद करने का निर्देश दिया था. इसके बावजूद पूर्व की घटनाओं से सबक न लेते हुए संवेदनहीन शिक्षा विभाग बच्चों की जिन्दगी से खिलवाड़ करने में लगी हुई है.

    रिपोर्ट: सुतिब्रो गोस्वामी, जरमुंडी/दुमका

     

     


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