झारखंड  भाजपा में बदलाव से किसी का टूट सकता है "वनवास" तो किसी को मिल सकता है "वनवास", कैसे- पढ़िए इस रिपोर्ट में 

    झारखंड  भाजपा में बदलाव से किसी का टूट सकता है "वनवास" तो किसी को मिल सकता है "वनवास", कैसे- पढ़िए इस रिपोर्ट में 

    धनबाद(DHANBAD): बाबूलाल मरांडी को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की कमान मिलने के बाद झारखंड के कई जिलों के समीकरण में उलट- पलट अथवा बदलाव हो सकते है. बाबूलाल मरांडी 2006 से पहले भाजपा में ही थे और झारखंड के सभी जिलों के कार्यकर्ताओं से कम से कम इनका सीधा संपर्क है. ऐसे में कार्यकर्ता भी उन्हें अपना मानते हैं और उनमें उत्साह भी बढ़ा  है. अटकलबाजी का जो दौर चल रहा था, वह खत्म हो गया है. बाबूलाल मरांडी अब प्रदेश अध्यक्ष बन गए है. उनके कार्यक्रम भी निर्धारित होने लगे है. वैसे भी प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद झारखंड सरकार के खिलाफ बाबूलाल मरांडी सबसे अधिक आक्रामक दिख रहे थे और अभी भी आक्रामक हैं, जहां तक धनबाद जिले की बात है तो धनबाद महानगर और ग्रामीण जिला अध्यक्ष का कार्यकाल भी खत्म हो गया है. ऐसे में महानगर और ग्रामीण जिला अध्यक्ष कौन होगा, इसका आकलन किया जा रहा है. अमूमन माना यही जाता रहा है कि धनबाद के सांसद पशुपतिनाथ सिंह उर्फ भाई जी जिसे चाहेंगे, वही जिला अध्यक्ष बन सकता है. हालांकि इसके लिए कई परिपाटियां  हैं लेकिन सब कुछ भाई जी के  निर्णय पर ही निर्भर करता है. धनबाद महानगर जिला अध्यक्ष के अधीन धनबाद, झरिया और बाघमारा जैसे महत्वपूर्ण विधानसभा सीट आते हैं, जबकि ग्रामीण भाजपा अध्यक्ष के अधीन टुंडी, निरसा और सिंदरी विधानसभा क्षेत्र आते है. 

    धनबाद के कुल छह सीट बनेँगे चुनौती 
     
    अभी 6 में से 4 सीट भाजपा के पास है. ऐसे में धनबाद के 6 सीटों को जीतना नहीं भी तो कम से कम 4 सीट पर अपनी जीत बरकरार रखना भाजपा के लिए चुनौती होगी. जिस हिसाब से गतिविधियां चल रही है, चुनाव नजदीक है, उसको देखते हुए ऐसा लगता है कि धनबाद महानगर और ग्रामीण जिला अध्यक्ष की नियुक्ति अथवा मनोनयन इसी महीने में संभव है. यह अलग बात है कि इसके लिए दौड़-धूप का सिलसिला शुरू हो गया है. वैसे ,2006 में बाबूलाल मरांडी जब भाजपा छोड़कर अपनी नई पार्टी बनाई  तो उस वक्त भाजपा के दो विधायक उनके साथ गए थे. रविंद्र राय और प्रदीप यादव. सबा अहमद भी झारखंड विकास मोर्चा के साथ हो लिए थे लेकिन वह उस वक्त राजद छोड़कर बाबूलाल मरांडी के साथ आए थे. रविंद्र राय भाजपा से त्यागपत्र नहीं दिया था लेकिन बाबूलाल मरांडी के साथ हो लिए थे. कालांतर में रविंद्र राय भाजपा में वापस हो गए लेकिन प्रदीप यादव भाजपा में जाने के बजाय कांग्रेस का साथ चुना  और वह कांग्रेस में चले गए. सबा अहमद का निधन हो गया. कहा जाता है कि कोडरमा से बाबूलाल मरांडी के सांसद बनने के बाद रविंद्र राय भाजपा में लौट गए. 

    2019 में कोडरमा अन्नपूर्णा देवी बनी  सांसद 

    हालांकि उनके समर्थक तर्क  दे रहे हैं कि जब जेबीएम के पदाधिकारियों की घोषणा होने लगी तो रविंद्र राय जेबीएम के पदाधिकारी बनने से बेहतर भाजपा में लौट जाना समझा और लौट गए. कोडरमा से भी वह सांसद रहे लेकिन 2019 में रविंद्र राय की जगह राजद से आई अन्नपूर्णा देवी को भाजपा ने कोडरमा से टिकट दिया और फिलहाल वह केंद्र में मंत्री है. रविंद्र राय फिलहाल राजनीतिक रूप से वनवास की जिंदगी जी रहे है. हो सकता है कि बाबूलाल मरांडी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद उन्हें कोई जिम्मेवारी मिले अथवा कहीं से टिकट देकर चुनाव लड़ाया जाए लेकिन यह सब भविष्य की बात है. बाबूलाल मरांडी के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद कई तरह की चर्चाएं चल रही है और कई ऐसे लोग  अपने भाग्य में बदलाव देख रहे है. देखना है किसके- किसके भाग्य में बदलाव होता है अथवा पहले की तरह उन्हें भी बनवास में ही रहना होगा. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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