झामुमो जिला समिति के गठन पर केंद्रीय नेतृत्व असमंजस में,जानिए 15 को कौन किस मकसद से पहुंच रहा धनबाद 

    झामुमो जिला समिति के गठन पर केंद्रीय नेतृत्व असमंजस में,जानिए 15 को कौन किस मकसद से पहुंच रहा धनबाद 

    धनबाद(DHANBAD): झारखंड मुक्ति मोर्चा की जन्मस्थली धनबाद में जिला से लेकर प्रखंडों में कमेटी के गठन को लेकर केंद्रीय नेतृत्व को नाकों चने चबाने पड़ रहे हैं. हालांकि प्रखंड कमेटियों का गठन हो गया है, अब बारी जिला समिति की है. लेकिन रांची में बैठकर धनबाद जिला समिति का गठन नहीं हो पा रहा है. जैसी की जानकारी है 15 जनवरी को झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडे धनबाद पहुंचेंगे. वह यहां संयोजक मंडली सहित झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर  करेंगे. सब की बात सुनने के बाद ही लगता है कि अब जिला समिति का गठन हो पाएगा. इधर ,झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष को लेकर उम्मीदवारों की लंबी फेहरिस्त है. उनमें से किसी एक के नाम पर सहमति बनाना केंद्रीय नेतृत्व के लिए बहुत आसान नहीं होगा.

    कहा जा सकता है कि धनबाद जिले में झारखंड मुक्ति मोर्चा के जिला अध्यक्ष को लेकर नेतृत्व असमंजस में है .झारखंड मुक्ति मोर्चा के पूर्व जिलाध्यक्ष रमेश  टुडू व पूर्व सचिव पवन महतो के बीच चले लंबे विवाद के बाद केंद्रीय नेतृत्व ने 29 नवंबर को समूचे जिले एवं प्रखंड कमेटी को भंग कर दिया था. एक संयोजक मंडली बनाई गई थी. इस कमेटी को जिम्मेवारी दी गई थी कि वह प्रखंड कमेटी का गठन करें.  संयोजक मंडली सभी प्रखंडों में गई लेकिन प्रायः जगहों पर कोई न कोई विवाद खड़ा हो गया. नतीजा हुआ कि सर्वसम्मति से एक नाम पर सहमति नहीं बनी. उसके बाद प्रखंडों से दो-तीन नाम लेकर मंडली के लोग वापस लौटे. उसके बाद हालांकि प्रखंड कमेटी की घोषणा कर दी गई है लेकिन अब जिला अध्यक्ष चुनाव की बारी है. जिला अध्यक्ष का चयन करना पार्टी नेतृत्व के लिए कम से कम धनबाद जिले में आसान नहीं  दिख रहा है. धनबाद में ही झारखंड मुक्ति मोर्चा का गठन हुआ था. शिबू सोरेन, बिनोद बिहारी महतो और एके राय ने मिलकर पार्टी का गठन किया था. लेकिन बाद में एके राय झारखंड मुक्ति मोर्चा से अलग हो गए और उन्होंने मार्कशिष्ट कोऑर्डिनेशन कमिटी नामक अलग पार्टी बना ली और जब तक जीवित रहे उसी के साथ जुड़े रहे. बिनोद बिहारी महतो का भी निधन हो गया है. इधर, शिबू सोरेन भी बढ़ती उम्र के चलते बहुत सक्रिय नहीं है. नतीजा है कि धनबाद जिले में पार्टी कमजोर हो रही है. झारखंड मुक्ति मोर्चा से जुड़े लोग ही पार्टी की जड़ में लड़ झगड़ कर मट्ठा डाल रहे हैं .नतीजा है कि केंद्रीय नेतृत्व को  फूक फूक कर कदम उठाना पड़ रहा है. देखना दिलचस्प होगा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा जिला अध्यक्ष की कमान किसे मिलती है.

    रिपोर्ट: सत्यभूषण सिंह, धनबाद 


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