नियोजन नीति, 1932 पर भ्रम और कई जिलों में पिछड़ों का आरक्षण शून्य होने के सवाल पर भाजपा लाने जा रही कार्यस्थल प्रस्ताव

    नियोजन नीति, 1932  पर भ्रम और कई जिलों में पिछड़ों का आरक्षण शून्य होने के सवाल पर भाजपा लाने जा रही कार्यस्थल प्रस्ताव

    रांची(RANCHI)- जिलावार आरक्षण रोस्टर में कई जिलों में पिछड़ों का आरक्षण किये जाने, नियोजन नीति और 1932 के खतियान भ्रम की स्थिति को दूर करने की मांग को लेकर भाजपा विधायक अनन्त ओझा ने विधान सभा के अन्दर कार्यस्थगन प्रस्ताव लाया है.

     बगैर संशोधन पिछड़ों को नहीं मिलेगा नियोजन का लाभ

    कार्यस्थल प्रस्ताव की जानकारी देते हुए राजमहल सीट विधान सभा से भाजपा विधायक अंनत ओझा बताया कि जिलावार आरक्षण रोस्टर की जो सूची जारी की गयी है, उसमें कई विसंगतियां है,  इस रोस्टर के हिसाब से कई जिलों में पिछड़ों का आरक्षण शुन्य कर दिया गया है. जबकि उन जिलों में पिछड़ों की एक बड़ी आबादी निवास करती है, यदि समय रहते इनके इस आरक्षण रोस्टर में संशोधन नहीं किया गया तो इन जिलों में पिछड़ों को नियोजन नीति का लाभ भी नहीं मिल पायेगा. यह पिछड़ों के साथ बड़ी हकमारी होगी.

    आज भी उलझा है नियोजन नीति का सवाल

    अंनत ओझा ने कहा कि इसके साथ ही आज भी झारखंड में नियोजन नीति का सवाल उलझा है, नियोजन नीति को लेकर किसी के पास कोई सटीक जानकारी नहीं है. विपक्ष हो या राज्य की जनता सब का अपना आकलन है. नियोजन नीति को लेकर पूरे राज्य में भ्रम की स्थिति है. कुछ लोग इसे 60:40   तो कई  लोग इसे 90:10 होने का दावा कर रहे हैं, सबकी अपनी राय है, लेकिन सरकार जानबुझकर इस भ्रम की स्थिति को बनाये रखना चाहती है. जबकि यह सरकार की जिम्मेवारी थी कि वह सामने आकर राज्य की जनता के सामने अपना तथ्य रखे.

    1932 के खतियान पर भ्रम की स्थिति

    इसके साथ ही अंनत ओझा ने 1932 के खतियान को लेकर भ्रम की स्थिति को भी दूर करने की मांग की. उन्होंने कहा कि राज्य की स्थानीय नीति को, जो 1932 के खतियान पर आधारित थी, राज्यपाल के द्वारा वापस किया जा चुका है. लेकिन उसके बाद राज्य सरकार का  उस मामले में अगला स्टैंड क्या होगा, इसकी कोई जानकारी नहीं है. हेमंत सरकार को इस मामले में भी अपना पक्ष रखना चाहिए.


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