बिहार -इफ्तार  पार्टी के बहाने कोई सियासत तो नहीं ,जानिए क्यों उठ रहे यह सवाल 

    बिहार -इफ्तार  पार्टी के बहाने कोई सियासत तो नहीं ,जानिए क्यों उठ रहे यह सवाल 

    धनबाद(DHANBAD): 1985 में बिहार विधानसभा में कुल 325 सीटें हुआ करती थी . उस समय झारखंड बटा नहीं था. अभी बिहार विधानसभा में 243 सीटें है. फिलहाल 17वे  बिहार विधानसभा में दलगत स्थिति के अनुसार आरजेडी 79 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है. तो बीजेपी के पास 77 विधायक है. जदयू के पास 45 है तो कांग्रेस के पास 19 , बाकी अन्य दलों के है. झारखंड, बिहार से ही अलग होकर बना है, इसलिए बिहार की हर पॉलीटिकल या सोशल गतिविधियों का असर झारखंड पर दिखता है.. बिहार में तो नाटकीय घटनाक्रम में नीतीश कुमार राजद के साथ आकर फिर से सरकार बना लिए. भाजपा ने कथित रूप से झारखंड में भी सरकार बदलने की कोशिश की ,लेकिन सफलता नहीं मिली. 

    झारखंड में अभी राजनीति गहमागहमी मची हुई है
      
    झारखंड में अभी राजनीति गहमागहमी मची हुई है. 11 अप्रैल को भाजपा झारखंड सचिवालय घेरने के लिए एड़ी चोटी एक किए हुए है. तो झारखंड मुक्ति मोर्चा खतियान यात्रा निकाल चुका है और अपनी गतिविधि को बनाए हुए है. राहुल गांधी के खिलाफ कार्रवाई के विरोध में झारखंड में पदयात्रा और सत्याग्रह चल रहा है. मतलब राजनीतिक दृष्टिकोण से झारखंड में अभी हर ओर गतिविधियां तेज है. इस बीच अखबारों में एक तस्वीर छपी है कि बिहार के पूर्व सीएम राबड़ी देवी के आवास में आयोजित राजद के इफ्तार  पार्टी में महा राजनीतिक जुटान  हुआ. इफ्तार  पार्टी में अमन चैन और भाईचारा के अलावे लालू प्रसाद की  सेहत के लिए दुआ मांगी गई. लालू प्रसाद ने भी इस इफ्तार  पार्टी के आयोजन की तैयारियों का जायजा वर्चुअल ढंग से लिया. 

    नीतीश कुमार,ललन सिंह सहित अन्य पहुंचे
     
    मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह सहित अन्य पहुंचे. कार्यक्रम में चिराग पासवान, पूर्व सांसद पप्पू यादव भी शामिल हुए. भाजपा के उपेंद्र कुशवाहा नहीं आये. बाकी कुछ दलों के प्रवक्ताओं ने हिस्सेदारी निभाई. चिराग पासवान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का आशीर्वाद लिया, चिराग पासवान ने  कहा कि आगामी चुनाव किसके साथ रहेंगे, चुनाव से पहले ही पता चल पाएगा. लालू प्रसाद के परिवार से उनका पुराना नाता है  और तेजस्वी की बेटी को जन्म की बधाई देना था. इसके साथ ही यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या यह कोई राजनीति कोई संकेत तो नहीं. 2020 के चुनाव में जदयू से कोई मुस्लिम उम्मीदवार नहीं जीता था. राजद से आठ जीते थे. ओबैसी की पार्टी से पांच जीते थे. जदयू ने 11 मुस्लिम को टिकट दिया था. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो


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