सावधान! अगर आप कर रहे हैं कुछ ऐसा महसूस तो हो जाएं सतर्क, हो सकते हैं डिप्रेशन का शिकार 

    सावधान! अगर आप कर रहे हैं कुछ ऐसा महसूस तो हो जाएं सतर्क, हो सकते हैं डिप्रेशन का शिकार 

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : देशभर में बीते दिन विश्व मानसिक दिवस मनाया गया. लोगों में मानसिक बीमारी को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए ये दिन मनाया जाता है. ताकि जो लोग इसके बारे में नहीं जानते है उन्हें इसके बारे में पता चले. अधिकतर लोग उन बीमारियों के बारे में जानते है जिसकी आम तौर पर चर्चा है. जो बीमारी दिखती है वो लोगों के नजर में है, मगर अक्सर ऐसा देखा गया है कि दिमाग की बीमारी को कोई बीमारी के रूप में नहीं लेता है. अगर कोई व्यक्ति ऐब्नॉर्मल बीहेव करता है तो उसे पागल ठहरा दिया जाता है. या कोई उसे जादू टोना का नाम दे देते है. अब सवाल ये है कि कोई कैसे पहचाने की वो खुद या सामने वाला कोई मानसिक रूप से बीमार है. तो आइए हम आपको बताते है कि इसके लक्षण क्या है. 

    दुखी और अकेलापन महसूस करना: यदि कोई व्यक्ति डिप्रेशन में है तो वह अधिकतर खुद को दुखी महसूस करता होगा और उसे कहीं ना कहीं एक अकेलापन भी लगता है. ऐसे वक्त में लोग खुद को बेसहारा महसूस करते है. 

    किसी काम में मन नहीं लगना: ऐसे समय में लोगों का काम पर ध्यान नहीं होता है उन्हें किसी चीज में मन नहीं लगता कितना भी वह कोई चीज करने की कोशिश कर ले वह अपना 100 प्रतिशन उसमें नहीं दे पाते हैं.

    शरीर में बदलाव: अलग-अलग लोगों को डिप्रेशन अलग तरीके से रिएक्ट करता है. कुछ लोग ऐसे समय में ज्यादा खाना शुरू कर देते हैं और उनका वजन एकदम से बढ़ जाता है या कुछ लोग ऐसे समय में खाना बिल्कुल ही छोड़ देते हैं जिससे उनका वजन कम हो जाता है.  यदि आपको लगातार खाने को लेकर रुचि नहीं हो रही है और आपकी वजन में भी काफी बदलाव देखने को मिल रहा है तो यह एक डिप्रेशन का संकेत हो सकता है. 

    नींद नहीं लगना: डिप्रेशन में नींद की समस्या काफी आती है कई लोग रात-रात भर सो नहीं पाते. मन में बेचैनी रहती है. जिसकी वजह से ठीक से सोया नहीं जाता नींद अधूरी रहती है और आपको एक भारी पन महसूस होता है.

    एनर्जी कम लगना : डिप्रेशन के कारण कुछ करने का मन नहीं होता आपका शरीर भी ढीली पड़ जाता है और आप काफी कमजोर महसूस करते हैं जिस वजह से आप कोई भी काम करने में रुचि नहीं दिखाते

    गुस्सा: डिप्रेशन के वक्त अधिकतर ऐसा देखा गया है कि लोगों को उनके इमोशंस पर कंट्रोल नहीं होता है वह चाह कर भी अपने किसी भी प्रकार के भाव को रोक नहीं पाते हैं चाहे वह रोना हो या गुस्सा करना खासतौर पर कई लोगों के अंदर चिड़चिड़ा बन जाता है और वह छोटी-छोटी बातों पर भी नाराज हो जाते है. 

    अपराधिक भाव रखना : डिप्रेशन के समय में लोगों को अपराधिक भावनाएं आती हैं खासकर नेगेटिव सोच लोगों के अंदर उत्पन्न होती है और वह हर बात में नेगेटिविटी लेते हैं. 

    आत्महत्या जैसा ख्याल आना : डिप्रेशन में कई लोग जीने की उम्मीद छोड़ देते हैं और ऐसे में उनके मन में मौत और आत्महत्या जैसी नकारात्मक ख्याल उत्पन्न होती है यह डिप्रेशन का सबसे अंतिम और खतरनाक स्टेज है.


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