कोई भी आंदोलन तभी सफल हो सकता है जब उसमें महिलाओं की भागीदारी हो: संजय बासु


रांची(RANCHI): महिला लैंगिक हिंसा प्रतिरोध पखवाड़ा के तहत HRDC सभागार में आदिवासी विमेंस नेटवर्क के द्वारा झारखंड में आंदोलन और राजनीति में महिलाओं की भागीदारी पर परिचर्चा की गई. इस दौरान कई आंदोलन में अपनी भागीदारी निभा चुकी कई महिला भी शामिल हुई. इस कार्यक्रम में नेतरहात फील्ड फाइरिंग रेंज में अपनी भूमिका निभाने वाली महिला आंदोलनकारियों को सम्मानित भी किया गया. कार्यक्रम महिला लैंगिक हिंसा प्रतिरोध पखवाड़ा के तहत आयोजित किया गया था. यह कार्यक्रम अन्तराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस 10 दिसम्बर कर जारी रहेगा.
झारखण्ड आन्दोलन में महिला भागीदारी का विश्लेषण करते हुए संजय बासु मलिक ने कहा की झारखण्ड राज्य एक सामाजिक-सांस्कृतिक आन्दोलन की देन है. जिसमें महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही. उन्होंने कहा की कोई भी आन्दोलन तभी सफल हो सकता है. जब उसमें महिलाओं की सक्रिय भागीदारी रहे.
दयामनी बरला ने झारखण्ड के जन आंदोलनों के अनुभवों को साझा करते हुए कहा की विस्थापन विरोधी आन्दोलनों की सफलता के पीछे महिलाओं का ईमानदार नेतृत्व रहा है. उन्होंने कहा की महिलाओं की राजनीति की दौड़ में भी आगे आना चाहिए. रेनू दीवान ने इस बात पर दुःख प्रकट किया की राजनितिक दलों द्वारा महिला नेतृत्व को स्वीकार नहीं किया जाता है .
कार्यक्रम में नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज आन्दोलन के वरिष्ठ महिला आन्दोलनकारियों तर्शिला खालखो, मगदली कुजूर, मरियम कुजूर, इग्नेशियस आइंद और एमिलिया किसपोट्टा को सम्मानित किया गया.परिचर्चा में जेरोम जेराल्ड कुजूर, हिरा मिंज, मेरी निशा हंसदा, दिनेश मुर्मू, आदि ने अपने विचार रखे. कार्यक्रम का सनचालन एलीना होरो ने किया.
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