देवघर में हुए प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के बाद अब दुमका में भी बैठक,  जानिए किन मुद्दों पर हुई चर्चा

    देवघर में हुए प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के बाद अब दुमका में भी बैठक,  जानिए किन मुद्दों पर हुई चर्चा

    दुमका (DUMKA) : देवघर में बीते 23 जनवरी को भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक शुरू हुई. 2 दिनों तक मंथन के बाद बैठक में कई निर्णय लिए गए. जिसके अनुरूप जिला स्तर पर दुमका जिला कार्यसमिति की बैठक शहर से दूर शिकारीपाड़ा में चल रही है. बैठक में प्रदेश नेतृत्व के निर्देशानुसार संगठन को मजबूत बनाने को लेकर कई मुद्दों पर चर्चा हुई. साथ ही राज्य सरकार की विफलता को जन-जन तक पहुंचाने के साथ केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को आम जनों तक पहुंचाने का निर्देश दिया गया. केंद्र से लेकर पंचायत तक भाजपा का बैठकों का दौर जारी है. बैठक में दो बिंदुओं पर चर्चा हो रही है. कैसे लोकसभा चुनाव में झारखंड के सभी 14 सीटों पर कब्जा हो साथ ही आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा राज्य में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएं. इसको लेकर बंद कमरे में लिए गए निर्णय को जन जन तक पार्टी कार्यकर्ता पहुंचाने में लगे हैं.

    संथाल परगना में अपनी पकड़ मजबूत करना ही थी पार्टी की मनसा

     देवघर में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक कराने के पीछे पार्टी की मनसा संथाल परगना में अपनी पकड़ मजबूत करने की रही होगी. अमूमन देखा जाता है कि संथाल परगना को सत्ता पाने का प्रवेश द्वार माना जाता है. संथाल परगना प्रमंडल के 6 जिलों में 18 विधानसभा तथा 3 लोकसभा क्षेत्र आते हैं. वर्तमान समीकरण को देखें तो संथाल परगना प्रमंडल के 3 लोकसभा सीटों में गोड्डा और दुमका सीट भाजपा के कब्जे में है जबकि राजमहल सीट पर आज भी झामुमो का कब्जा बरकरार है. वहीं विधानसभा में भाजपा को महज 4 सीट पर ही संतोष करनी पड़ी. जबकि प्रमुख सत्ताधारी दल झामुमो ने 9 सीटों पर कब्जा जमाया और सहयोगी रहे कांग्रेस को की 5 सीटें मिली. इस तरह झामुमो और कांग्रेस ने मिलकर सरकार बनाई.

    थोड़ा पीछे चलते हैं

    अब हम आपको थोड़ा पीछे ले जाना चाहते हैं. वर्ष 2016, राज्य में रघुवर दास के नेतृत्व में भाजपा की सरकार वही केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार थी. वर्ष 2016 में दुमका में भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक संपन्न हुई थी. तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष ताला मरांडी के नेतृत्व में यह बैठक संपन्न हुई थी. ताला मरांडी खुद संथाल परगना प्रमंडल से ताल्लुकात रखते हैं. 2 दिनों के मंथन के बाद जब बैठक समाप्त हुई तो भाजपा नेताओं ने झामुमो मुक्त संथाल परगना और झामुमो मुक्त झारखंड का नारा बुलंद किया था। नारा को अमलीजामा पहनाने के लिए प्रदेश से लेकर पंचायत स्तर के कार्यकर्ताओं तक को होमवर्क दिए गए. तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास का फोकस भी संथाल परगना प्रमंडल पर रहा था. अमूमन प्रत्येक महीने उनका दौरा संथाल परगना प्रमंडल के किसी ना किसी जिले में होता था. जनता के समक्ष मंच से केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार की उपलब्धियों को गिनाया जाता था. इसके बावजूद वर्ष 2019 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव की बात करें तो लोकसभा चुनाव में भाजपा को एक सीट का फायदा हुआ. 14 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का एक मात्र सीट गोड्डा पर कब्जा था. वर्ष 19 के चुनाव में भाजपा ने गोड्डा सीट को बरकरार रखते हुए दुमका सीट पर झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन को पराजित कर भाजपा के सुनील सोरेन सांसद बने. लोक सभा चुनाव में झामुमो मुक्त संथाल परगना का सपना भाजपा का टूट गया. रही सही कसर विधान सभा चुनाव ने पूरी कर दी. झामुमो मुक्त तो दूर अपना सीट भी सुरक्षित नहीं रख पाए. भाजपा को गोड्डा, राजमहल, देवघर और सारठ सीट से संतोष करना पड़ा.

    हार की समीक्षा

    चुनाव परिणाम आने के बाद पार्टी का शीर्ष नेतृत्व भी सख्ते में आ गया. डबल इंजन की सरकार रहने के बाबजूद नेता मतदाता का दिल नहीं जीत पाए. हार की समीक्षा की गई. गलती से सबक लेते हुए आगे बढ़ने का निर्णय लिया गया. वर्ष 2024 चुनाव का वर्ष है. पहले लोक सभा और उसके बाद विधान सभा का चुनाव होगा. सभी राजनीतिक दल चुनावी रणनीति बनाने में जुट गई है. इसी कड़ी में भाजपा का देवघर में प्रदेश कार्य समिति की बैठक सम्पन्न हुई. जिला स्तर पर जिला कार्यसमिति की बैठक का दौर जारी है. भाजपा की नजर संथाल परगना प्रमंडल पर है.

    सरकार की उपलब्धि गिना कर भी सत्ता को बरकरार नहीं रख पाई भाजपा

    सत्ता में रहकर अपनी सरकार की उपलब्धि गिना कर भी भाजपा अपनी सत्ता को बरकरार नहीं रख पाया. अब जबकि भाजपा राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी है और संथाल परगना प्रमंडल झामुमो का गढ़ माना जाता है तो भाजपा के पास सरकार को घेरने के कई मुद्दे है. ईडी प्रकरण हो या राज्य में अवैध उत्खनन का मामला, स्थानीय और नियोजन नीति हो या फिर 1932 का खतियान. झामुमो के चुनावी घोषणा पत्र के अनुरूप जनता से किए गए वायदे हो या फिर राज्य में गिरती कानून व्यवस्था. भाजपा नेता और कार्यकर्ता संथाल परगना प्रमंडल के मतदाताओं के रिझा पाती है या नहीं यह तो समय आने पर पता चलेगा लेकिन इतना जरूर है कि जनता का दिल जीतने के पहले पार्टी के अंदर चल रहे गुटबाजी को समाप्त करना होगा. कहा भी जाता है कि घर का भेदी लंका ढाहे.

    रिपोर्ट : पंचम झा, दुमका


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