बोकारो स्टील प्लांट में नियुक्ति घोटाले के बाद अब प्रमोशन घोटाला, पढ़िए खबर की डिटेल्स

    बोकारो स्टील प्लांट में नियुक्ति घोटाले के बाद अब प्रमोशन घोटाला, पढ़िए खबर की डिटेल्स

    धनबाद(DHANBAD):  बोकारो स्टील प्लांट में नियुक्ति घोटाले के बाद प्रमोशन घोटाला सामने आया है. झारखंड बनने के बाद ही बोकारो स्टील प्लांट में नियुक्ति घोटाला हुआ था. जिसमें कई बड़े-बड़े लोगों के  आश्रितों को गलत ढंग से नौकरी दी गई थी. इसके बाद अब बोकारो स्टील प्लांट में प्रमोशन  घोटाले का खुलासा हुआ है.

    सीबीआई की धनबाद एंटी करप्शन ब्रांच ने इस मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. सीबीआई की धनबाद एंटी करप्शन ब्रांच ने इस मामले में प्रमोशन पाने वाले 16 कर्मचारियों के अलावे भारत सरकार के सूचना प्रसारण मंत्रालय के अधीन चलने वाली मिनी रत्न कंपनी  ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड के अज्ञात अधिकारियों को आरोपी बनाते हुए जांच शुरू कर दी है. यही कंपनी थी जो प्रमोशन के लिए कर्मियों की लिखित परीक्षा ली थी .

    दरअसल, 6 नवंबर 2022 को बोकारो स्टील लिमिटेड के गैर राजपत्रित कर्मियों के एग्जीक्यूटिव ग्रेड पर प्रमोशन के लिए परीक्षा ली गई थी. आरोप लगा है कि परीक्षा में पैरवी और पैसों का खुलकर खेल हुआ है. गड़बड़ी के बीच 16 कर्मियों को सफल बताते हुए उन्हें प्रमोशन के लिए योग्य बताया गया. परीक्षा पर जब सवाल उठने लगे तो विजिलेंस ने मामले की जांच की. जांच में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद भारत सरकार के इस्पात मंत्रालय के विजिलेंस डायरेक्टर ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की थी. इसी आधार पर सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. जांच में यह बात सामने आई है कि बोकारो सेंटर पर परीक्षा में शामिल 22 कर्मियों की ओएमआर शीट खाली थी अथवा इसमें कुछ ही प्रश्नों के उत्तर दिए गए थे. इस ओएमआर शीट की तस्वीर परीक्षा केंद्र पर ड्यूटी कर रहे सेल कर्मियों ने ली थी. इनमें से 14 कर्मियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था.

    बात इतनी ही नहीं, कहा गया है कि कार्मिक निदेशालय में अधिकारियों की ओर से लापरवाही को छुपाने का भरपूर प्रयास किया गया है. प्रमोशन घोटाले को लेकर बोकारो स्टील प्लांट एक बार फिर चर्चा में आ गया है. बोकारो स्टील प्लांट को देश का पहला स्वदेशी स्टील प्लांट के रूप में भी जाना जाता है. उपकरण साज सामान सभी स्वदेशी बताए जाते हैं.1965 में सोवियत संघ के सहयोग से यह प्लांट शुरू हुआ था.

    रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो


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