मनी लाउंड्रिग केस में 5 साइबर ठग दोषी करार, 23 जुलाई को पीएमएलए कोर्ट सुनाएगा सजा

     मनी लाउंड्रिग केस में 5 साइबर ठग दोषी करार, 23 जुलाई को पीएमएलए कोर्ट सुनाएगा सजा

    रांची(RANCHI) : रांची की पीएमएलए कोर्ट ने जामताड़ा के चर्चित साइबर अपराधी प्रदीप मंडल सहित पांच को दोषी करार दिया है. पीएमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश पीके शर्मा ने आरोपियों को सजा सुनाने के लिए 23 जुलाई की तिथि निर्धारित की है. न्यायालय द्वारा साइबर अपराधियों को दोषी करार दिये जाने के बाद उन्हें रांची के बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल भेज दिया गया.

    क्या है कोर्ट के फैसले मे

    पीएमएलए कोर्ट के न्यायाधीश ने 20 जुलाई को एक दायर आरोप पत्र पर सुनवाई करने के लिए निर्धारित की थी. सभी आरोपी इस तिथि पर न्यायालय में मौजूद थे. न्यायाधीश ने उपस्थिति की जांच करने के बाद अपना फैसला सुनाया. उनके फैसले में यह कहा गया कि अदालत ने पांच आरोपियों को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में दोषी ठहराया है, उन्होंने इस फैसले का आधार दलीलों और गवाहों के साथ रखा है.  

    क्या है पूरा मामला

    सभी आरोपी इस मामले में पहले बेल पर थे. ईडी ने जामताड़ा थाने में प्राथमिकी संख्या 207/2015 के तौर पर इस FIR को दर्ज करके मामले की जांच शुरू की थी. जांच के बाद ईडी ने सितंबर 2022 में आरोपियों के खिलाफ पहला आरोपनामा दायर किया था. इस से पहले दायर किए गए आरोपनामों के संदर्भ में न्यायालय ने 30 नवंबर 2019 को आरोपियों के खिलाफ आरोपी साझेदारी बनाई थी.

    कुख्यात आपराधी पर बन चुकी है वेबसीरिस  

     जामताड़ा में चल रहे साइबर अपराध के मामले में प्रदीप मंडल एक प्रमुख नाम है. इसके आरोपों से प्रदीप मंडल की बड़ी पहचान है और उनके कारनामों से यह स्पष्ट होता है कि वे एक बड़ा खिलाड़ी हैं. जामताड़ा नामक वेब सीरीज ने प्रदीप मंडल की कारनामों को अंकित किया था. यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि उन्हें साइबर अपराधों की कारस्तानी के लिए जामताड़ा में पर्याप्त उर्जा थी. गुजरात में भी इन साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की प्राथमिकता है. गुजरात पुलिस ने इन्हें पहले ही गिरफ्तार किया था और उनके खिलाफ कदम उठाए गए थे.  

    ईडी ने जब्त की लाखों की संपत्ति

     जांच के दौरान ईडी ने इन अपराधियों द्वारा प्राप्त 65.99 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की है. इन साइबर अपराधियों ने ठगी की राशि को विभिन्न ई-वॉलेट में स्थानांतरित करने के लिए 33 ई-वॉलेट का उपयोग किया था. गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद, इसमें से नौ को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था. जांच के दौरान ईडी ने आरोपी साइबर अपराधियों के बैंक खातों में जमा की गई राशि और प्राप्त संपत्ति के पैसे के स्रोतों की जांच की थी. हालांकि, कोई भी साइबर अपराधी पैसों के वैध स्रोत की जानकारी नहीं दे सका.  


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