प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से गुहार लगाकर थक चुके मजदूर, नहीं मिली मजदूरी- 1992 से बंद है जपला फैक्ट्री 

    प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से गुहार लगाकर थक चुके मजदूर, नहीं मिली मजदूरी- 1992 से बंद है जपला फैक्ट्री 

    पलामू (PALAMU): हुसैनाबाद अनुमंडल क्षेत्र में बंद पड़ी जपला सीमेंट फैक्ट्री के मजदूरों ने सरकारी सिस्टम पर लापरवाही करने का आरोप लगाया है. मजदूर यूनियन के नेता रामचंद्र चौधरी प्रधानमंत्री, श्रम मंत्री  और बिहार के मुख्यमंत्री को पत्र के माध्यम से गुहार लगाकर थक चुके हैं, लेकिन मजदूरों के लंबित वेतन का भुगतान अजाज तक नहीं हो सका है. जिससे मजदूरों में काफी नाराजगी है. बता दें कि जपला सीमेंट फैक्ट्री 1992 से लगातार बंद हैं, सीमेंट फैक्ट्री और बौलिया माइंस के सैकड़ों मजदूरों का पैसा बाकी है.

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    मजदूरों का सुधि लेने वाला नहीं

    कई मजदूर तो पैसे का इंतजार करते-करते इस दुनिया से चले गए. हाल ही में जब सीमेंट फैक्ट्री के परिसंपत्ति को उच्च न्यायालय ने स्क्रैप नीलामी कराया. जिसमें उपेंद्र सिंह ने नीलामी को खरीद लिया. और फैक्ट्री का सामान कटकर जाने लगे. मजदूरों का कहना है कि अनुमंडल पदाधिकारी और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी पहले में 17 सितंबर 2018 को धरना दे रहे मजदूरों को आश्वस्त किया था. उनके भरोसे में आकर मजदूरों ने अपने धरने को समाप्त कर दिया था. लेकिन वो मात्र आश्वासन ही साबित हुआ. मामला हाईकोर्ट तक जा चुका है.लेकिन आज तक उनकी मजदूरी के भुगतान के लिए कोई सुधि लेने वाला नहीं हैं. जिससे मजदूर काफी आहत है. मजदूर यूनियन के नेता रामचंद्र चौधरी ने कहा कि दो दिन पूर्व एक मजदूर का इलाज के बारे में  विभिन्न समाचार पत्रों में खबर छपी थी. झारखण्ड सरकार के मंत्री के संज्ञान के बाद उसे इलाज कराने ले जाया गया. ऐसे कई मजदूर हैं जो भूख प्यास और दवा के अभाव में रोज मर रहे है.

    रिपोर्ट- जफर हुसैन, पलामू


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