साढ़े तीन करोड़ से बना स्कूल भवन में न शौचालय हैं और न ही खिड़की-दरवाजे, नाम है मॉडल स्कूल मनोहरपुर

    साढ़े तीन करोड़ से बना स्कूल भवन में न शौचालय हैं और न ही खिड़की-दरवाजे, नाम है मॉडल स्कूल मनोहरपुर

    चाईबासा(CHAIBASA): नक्सल प्रभावित मनोहरपुर इलाके में शिक्षा का मजाक उड़ रहा है. शिक्षा विभाग ने बिना तैयारी के ही मॉडल स्कूल मनोहरपुर को ऐसे नवनिर्मित स्कूल भवन में शिफ्ट कर दिया है जहां मूलभूत सुविधाएं तक नहीं है. स्कूल भवन में छठी से दसवीं तक की कक्षाएं चलती हैं. लेकिन ये भवन पहले से ही जर्जर है. इलाके के आदिवासी बच्चों को पढ़ाने-लिखाने के लिये बने इस स्कूल में किसी भी प्रकार की मूलभूत सुविधा नहीं है. स्कूल में न तो शौचालय हैं और न ही पेयजल की व्यवस्था. इतना ही नहीं स्कूल में बिजली भी नहीं है. हैरानी की बात तो ये है कि स्कूल से खिडकी-दरवाजे भी गायब है. ताज्जुब की बात ये भी है कि साढ़े तीन करोड़ की लागत से बननेवाला यह भवन हाल ही में तैयार हुआ था. लेकिन इसमें स्कूल चालू होने के पूर्व ही यह भवन टूटने-फूटने लगा है. छत का प्लास्टर जब तब गिरते रहता है. ऐसे में विद्यार्थियों की जिंदगी भी हरपल खतरे में है. बावजूद छात्र-छात्राओं को इन्हीं जर्जर भवन के अंदर बैठाकर शिक्षा दी जा रही है. सबसे हैरानी की बात ये भी है कि स्कूल में सबसे जरूरी चीज पानी भी नहीं है. बच्चों को दो किलोमीटर दूर एक स्कूल के पास लगे चापाकल पर जाकर प्यास बुझाना पड़ता है. इतना ही नहीं, प्राचार्य और शिक्षक भी इसी पानी पर निर्भर हैं. यह बात प्रभारी प्राचार्य महेश्वर महतो भी मानते हैं और कहते हैं कि दो किलोमीटर दूर जाकर बच्चे प्यास बुझाते हैं. स्कूल में चापाकल भी नहीं है.  

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    शौचालय की भी नहीं हैं सुविधा

    इस मॉडल स्कूल में एक अदद शौचालय की भी सुविधा नहीं है. शौचालय बना तो था लेकिन ये भी पहले ही जर्जर हो चुका है. उपयोग के लायक भी नहीं रह गया है. स्कूल भवन की दीवारों में जगह-जगह से दरारें पड़ चुकी हैं. क्लासरूम की अंदरुनी छतों से प्लास्टर गिरता रहता है. लेकिन, शिक्षा विभाग को इसकी जरा भी परवाह नहीं है.  

    13 दिन पहले ही इस भवन में शिफ्ट हुआ था स्कूल

    प्रभारी प्राचार्य महेश्वर महतो के अनुसार मॉडल स्कूल के इस भवन में 6 जून को स्कूल शिफ्ट हुआ था. इसके पहले प्रखंड संसाधन भवन में यह स्कूल संचालित था. जब स्कूल का अपना भवन बना तो स्कूल को उसमें शिफ्ट कर दिया गया. लेकिन, इस भवन में बिजली, पानी, शौचालय, पंखा आदि भी नहीं है. दरवाजे खिड़कियां तो पहले से ही नदारद हैं.  

    जिला परिषद उपाध्यक्ष रंजीत यादव ने किया निरीक्षण

    स्थानीय जिला परिषद सदस्य सह जिला परिषद उपाध्यक्ष रंजीत यादव ने जब इस स्कूल का निरीक्षण किया तो वो भी हैरान रह गये. क्योंकि स्कूल में सुविधाएं नगण्य थीं. शौचालय के अभाव में लड़कियां झाड़ियों में जाने को विवश हैं. रंजीत यादव ने स्कूल के निरीक्षण के बाद कहा कि वे इस मामले की डीडीसी से शिकायत करेंगे. उन्होंने कहा कि हैरानी की बात है कि स्कूल में सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है. बावजूद पदाधिकारी चुप हैं. यह जांच का विषय है. बिल्डिंग को कैसे जर्जर अवस्था में हैंडओवर किया गया है?

    रिपोर्ट: संतोष वर्मा, चाईबासा  


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