सारंडा-कथा: इंतजार ही करते रहे गए बच्चे, नहीं आई स्कूल बस - परीक्षा से वंचित हो गए कई गांव के Students                                    

    सारंडा-कथा: इंतजार ही करते रहे गए बच्चे, नहीं आई स्कूल बस - परीक्षा से वंचित हो गए कई गांव के Students                                    

    चाईबासा(CHIBASA): झारखंड का सारंडा यानी ऐसा घना जंगल जहां सूरज भी दोपहर में उगता रहा है यही सबब है कि नक्सलियों ने इसे अपना सुरक्षित ठिकाना बनाया दूसरी ओर सरकारी प्रयास भी कभी-कभार होते रहे कि शिक्षा और विकास की रोशनी यहां भी पहुंचे, लेकिन सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही बार-बार बाधा बनकर खड़ी हो जाती है इस इलाके के बच्चे परीक्षा से ही वंचित कर दिये गए, जानिये अब विस्तार से:

    बस का इंतजार ही करते रहे गए बच्चे

    खबर है कि 6 जून को बच्चों का स्कूल खुला था और वर्ग 1 से 7 तक की कक्षाओं के लिए की गणित की परीक्षा थी. लेकिन इसमें सारंडा के करमपदा, थोलकोबाद, चेरवालोर, धर्नादिरी, बालेहातु, कादोडीह आदि गांव के बच्चे शामिल नहीं हो सके. दरअसल उनकी स्कूल बस आई ही नहीं.  बच्चों ने बताया कि उनको स्कूल लाने और ले जाने के लिये सेल प्रबंधन भाड़े की बस उपलब्ध कराता है. थोलकोबाद और करमपदा क्षेत्र के बच्चों के लिये अलग-अलग बस की व्यवस्था है. लेकिन आज दोनों स्थानों पर कोई भी बस नहीं गई. 

    बस संचालक ने कहा स्कूल प्रबंधक ने नहीं दी जानकारी

    थोलकोबाद क्षेत्र के बच्चों के लिये बस उपलब्ध कराने वाले बस संचालक रामाशीष गुप्ता ने बताया कि उन्हें स्कूल प्रबंधन ने कोई जानकारी नहीं दी थी कि आज स्कूल खुल गया है और परीक्षा भी है. इसलिए आज बस नहीं जा सकी. कल से बस नियमित भेजी जायेगी. रामाशीष ने बताया कि करमपदा क्षेत्र के लिये बस की निविदा समाप्त है. सेल प्रबंधन नयी निविदा कराई है एंव संभावना है कि 2-4 दिन में निविदा खुलने के बाद नये सिरे से बस संचालक को बस चलाने का कार्यादेश मिल जाए. इसके बाद करमपदा का भी समस्या का समाधान हो जायेगा.

    रिपोर्ट: संदीप गुप्ता, चाईबासा

     

     


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