Live Update : मुख्यमंत्री हेमंत से जुड़े खान आवंटन, शेल कंपनियों और मनरेगा घोटाले पर आज , एक साथ सुप्रीम कोर्ट और हाइकोर्ट में सुनवाई

    Live Update : मुख्यमंत्री हेमंत से जुड़े खान आवंटन, शेल कंपनियों और मनरेगा घोटाले पर आज , एक साथ सुप्रीम कोर्ट और हाइकोर्ट में सुनवाई

    रांची(RANCHI): मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से जुड़े खान आवंटन ,शेल कंपनि और मनरेगा घोटाला मामले में आज एक साथ सुप्रीम कोर्ट और झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई होगी.

     सुप्रीम कोर्ट में झारखंड सरकार ने स्पेशल लीव पीटिशन (एसएलपी) दायर कर रखा है, जिसमें झारखंड हाईकोर्ट में चल रहे 727 ऑफ 2022, 4290 ऑफ 2021 और मनरेगा मामले को निरस्त करने की अपील की गयी है. सुप्रीम कोर्ट में दायर एसएलपी की डायरी संख्या 16067 ऑफ 2022 की वैकेशन कोर्ट में सुनवाई होगी.
     सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने झारखंड सरकार का पक्ष रखते हुए 24 मई तक का समय मांगा था. इसी दिन सुनवाई की तिथि भी तय है. वहीं झारखंड हाईकोर्ट में तीनों मामले में आज दिन के  11 बजे से सुनवाई तय है. 19 मई को हुई सुनवाई के दौरान ईडी की तरफ से सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सीलबंद लिफाफे में सप्लीमेंटरी एफीडेविट फाइल किया था. इसे मुख्य न्यायाधीश डॉ रवि रंजन और सुजीत नारायण प्रसाद की पीठ ने जवाब को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था. 

    अब यह देखना जरूरी होगा कि सुप्रीम कोर्ट में दायर एसएलपी मामले में ट्रिपल बेंच का क्या रूख होगा. हालांकि इस बीच शिवशंकर शर्मा ने भी कैविएट (आपत्ति याचिका) दायर कर रखी है. प्रवर्तन निदेशालय ने भी कैविएट दायर कर झारखंड सरकार के तीनों याचिकाओं को निरस्त करने की अपील पर नाराजगी जतायी है.  

     

    खान आवंटन मामले में 19 की सुनवाई के दौरान खंडपीठ को यह बताने की कोशिश की गयी थी कि कैसे एक संगठित गिरोह बना कर अवैध खनन किया जा रहा है. इससे अर्जित होनेवाली राशि को मनी लाउंड्रिंग के जरिये सफेद किया जा रहा है. इसमें रवि केजरीवाल और उनके सहयोगियों के 32 शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया जा रहा है.
    वहीं मनरेगा घोटाले मामले में भी मंगलवार को सुनवाई होगी. इसमें ईडी की तरफ से कहा गया है कि 2007-08 से लेकर 2012-13 तक हुई गड़बड़ियों की लगातार जांच की जा रही है. इन्वेस्टिगेशन के क्रम में 16 प्राथमिकी दर्ज होने की बातें भी सामने आयी हैं. अब तीनों मामलों पर सरकार की ओर से जवाब भी मांगा गया है. उधर झारखंड सरकार की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकूल रोहतगी और कपिल सिब्बल बार-बार यह कह रहे हैं की शिव शंकर शर्मा की दो याचिकाओं में पर्याप्त सबूत नहीं हैं, दस्तावेज नहीं है, जो मेंटेनेबल नहीं है.


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