कैंसर से जूझ रहा गरीब, मदद के लिए सरकार से लगाई गुहार

    कैंसर से जूझ रहा गरीब, मदद के लिए सरकार से लगाई गुहार

    पलामू (PALAMU) : देश और राज्य में कई स्वास्थ्य योजनाओं के बावजूद कैंसर जैसी बीमारी से जूझ रहे गरीब इलाज के लिए तरस रहे हो तो योजनाओं की सार्थकता सवाल के घेरे में है. राज्य के मंत्री चंपई सोरेन ने पलामू डीसी को ट्वीट कर तत्काल मदद करने के लिए निर्देश दिए. लेकिन अभी तक कोई भी रमेश पासवान की मदद के लिए आगे नहीं आया. रमेश की 5 छोटी-छोटी बेटियां हैं, और उसकी पत्नी घर का खर्चा किसी दूसरे घर में काम कर जीविका चला रही है. 

    ट्वीट कर सरकार से मदद की गुहार

    जिले के छत्तरपुर बस स्टैंड स्थित पासवान टोला निवासी 35 वर्षीय रमेश पासवान इन दिनों कैंसर से जूझ रहे हैं. छत्तरपुर के समाजसेवी अरविंद प्रताप (चुनमुन) ने ट्वीट कर सोशल मीडिया पर उनकी मदद के लिए आग्रह किया था और ट्वीट के द्वारा रमेश की एक फोटो भी शेयर कर मुख्यमंत्री सहित स्वास्थ्य मंत्री से मदद की गुहार लगाई.  उन्होंने ट्वीट में लिखा कि “रमेश कैंसर से जूझ रहे हैं और अपने परिवार में अकेले कमाने वाले के परिवार को मदद की जरूरत है. हमारी और आपकी छोटी-छोटी मदद रमेश को कैंसर से लड़ने में मदद करेगी”.

    बढ़े मदद के हाथ

    पलामू सिविल सर्जन के निर्देश पर छतरपुर चिकित्सा प्रभारी राजेश कुमार अग्रवाल व छतरपुर कार्यपालक पदाधिकारी कामेश्वर बेदिया ने मरीज के घर पहुंच कर जांच किया. इस दौरान चिकित्सा प्रभारी ने बेहतर इलाज को लेकर व्यवस्था की है. वहीं कार्यपालक पदाधिकारी ने इस गरीब परिवार को इलाज के लिए सहयोग करने की सरकार से अपील की है. समाजसेवी अरविंद प्रताप (चुनमुन) ने रमेश पासवान को पूर्व में रिम्स रांची में इलाज के लिए 10 हजार रुपए के साथ काफी मदद करने की कोशिश भी की थी. लेकिन आयुष्मान कार्ड पर भी इलाज नहीं हो सका है.

    गरीबी के कारण नहीं हो पा रहा है इलाज

    रमेश की पत्नी सुनीता देवी ने बताया कि इसी वर्ष चार माह पूर्व किसी तरह रांची रिम्स में दिखाया था. जांच पड़ताल के बाद डॉक्टरों ने मुंह का कैंसर होने की बातें कही. जिसके बाद इलाज कर थोड़ी बहुत दवाइयाँ देकर रांची रिम्स के डॉक्टर ने घर वापस जाने की बातें कही थी. पीड़ित की पत्नी ने कहा कि पैसे के अभाव में इलाज नहीं हो पा रहा था जिसके चलते रमेश अपने स्वजनों के साथ रांची से गांव लौट आए. वहीं रमेश के स्वजन कहते हैं कि कैंसर का नाम सुनते ही जहां पूरे घर में मातम छा गया था लेकिन गरीबी के चलते रांची रिम्स में इलाज कराने वह नहीं जा पा रहा है.

     

     

    रिपोर्ट : अरविन्द अग्रावल, छत्तरपुर/पलामू


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