13 साल बाद भी नहीं मिला न्याय, 13 दीए जलाकर मां किया शंखनाद , जारी रहेगी लडाई

    13 साल बाद भी नहीं मिला न्याय, 13 दीए जलाकर मां किया शंखनाद , जारी रहेगी लडाई

    जमशेदपुर(JAMSHEDPUR): आज ट्रेनी एयर होस्टेस मौसमी चौधरी की 13वीं पुण्यतिथि है. कोविड और अपने खराब तबियत के मद्देनज़र मां तापसी चौधरी ने सार्वजनिक जगह पर कोई कार्यक्रम करने की जगह घर पर ही मौसमी के चित्र की पूजा कर और शंख बजाकर श्रद्धांजलि दी. उन्होंने काला बिल्ला लगाकर 13 दीये जलाकर मरते दम तक न्याय की लड़ाई जारी रखने का ऐलान किया. सामाजिक कार्यकर्ता राधाकांत ओझा भी मौसमी के घर पहुंचे और तापसी चौधरी के साथ मिलकर श्रद्धांजलि दी.

    मौसमी कांड क्या है?

    आहा संस्थान की ट्रेनी एयर होस्टेस  मौसमी चौधरी को  जमशेदपुर के मशहूर होटल सोनेट से 9मई 2009 को संदिग्ध परिस्थितियों में टीएमएच लाया गया था, जहां पहले आईसीयू फिर सीसीयू में इलाजरत रहने के बाद 20 मई को उसे मृत घोषित किया गया था. मां तापसी चौधरी ने बेटी के साथ होटल में दुष्कर्म कर हत्या का आरोप लगाया था. मां का स्पष्ट कहना था कि मौसमी की हत्या 9मई 2009 को ही हो गई थी और टीएमएच में तत्कालीन टाटा स्टील के वीपी पार्थो सेन गुप्ता के दबाव पर जबरन मौसमी के शव को रखा गया था . बाद में 20मई को टीएमएच  में उसे मृत घोषित किया गया था.

    मां का आरोप है कि होटल मालिक की पहुंच टाटा के अधिकारियों और पुलिस तक होने की वजह से पुलिस लेवल पर मामले की लीपापोती कर दी गई. बाद में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दो दो बार सीबीआई जांच हुई लेकिन न्याय नहीं मिला.मां ने आरोप लगाया है कि रसूखदार आरोपियों की वजह से सीबीआई भी बिक गई. मां को न्यायालय पर भरोसा है. मां का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में प्राईवेट पार्टस पर चोट के निशान हैं जिसे देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को धारा 302के तहत मां के बयान के आधार पर मामला दर्ज कर अनुसंधान के निर्देश दिए थे लेकिन सीबीआई ने लीपापोती की.उससे पहले पुलिस ने भी संदिग्ध हालत में भर्ती बताई गई मौसमी का न तो बयान लिया और न ही मेडिकल और अन्य जांच की..

    सीबीआई दुर्घटना मानने का दबाव डालती है

    मां तापसी चौधरी ने आरोप लगाया कि सीबीआई लगातार दबाव बना रही है कि वह अपनी बेटी के साथ हुई घटना को दुर्घटना मान ले और वैसी गवाही दे.लेकिन मां तापसी चौधरी ने मरते दम तक न्याय के लिए लड़ने की बात कही है.

    रिपोर्ट: अन्नी अमृता, ब्यूरो हेड, जमशेदपुर

     


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