भ्रष्टाचार का सबूत स्वास्थ्य विभाग की फाईलों में, मैंने तो बस उजागर किया फिर मानहानि कैसे- सरयू राय

    भ्रष्टाचार का सबूत स्वास्थ्य विभाग की फाईलों में, मैंने तो बस उजागर किया फिर मानहानि कैसे- सरयू राय

    जमशेदपुर(JAMSHEDPUR):स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता की ओर से जमशेदपुर कोर्ट में सरयू राय के खिलाफ मानहानि से संबधित शिकायतवाद पर सरयू राय ने पलटवार किया है.उन्होंने आज प्रेस रिलीज़ जारी करते हुए कहा है कि स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के पीए ने बयान देकर बताया है कि बन्ना जी ने उन पर मानहानि का मुक़दमा किया है. यह वक्तव्य मंत्री को अथवा इनके अधिवक्ता को देना चाहिये था. 

    सरयू राय का प्रेस वक्तव्य

     मैं इसका स्वागत करता हूं. उन्होंने मुझे अवसर दिया है कि मैं इस विषय में तथ्य माननीय न्यायालय के सामने रख सकूँ. मुझे पता नहीं कि यह मुक़दमा उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के रूप में किया है या व्यक्तिगत रूप में दायर किया है. उन्होने मुक़दमे में न्यायालय को दी गई अर्ज़ी भी सार्वजनिक नहीं किया है.

    मैंने कोविड प्रोत्साहन की राशि स्वयं लेने, मंत्री कोषांग के कर्मियों को देने तथा जो उनके कोषांग का कर्मी नहीं है उसका नाम भी प्रोत्साहन राशि लेने वालों की सूची में दर्ज कराने के स्वास्थ्य मंत्री के अनियमित आचरण पर सवाल उठाया जिसे अख़बारों ने छापा. मैंने इस बारे में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अवगत कराया और श्री बन्ना गुप्ता को मंत्री पद से बर्खास्त करने की मांग की. पत्र के साथ जो काग़ज़ात मैंने लगाया वे सभी काग़ज़ात स्वास्थ्य विभाग की फ़ाइलों में हैं. इससे उनकी मानहानि कैसे हो गई ?

    मंत्री ने संचिका में अपने कोषांग कर्मियों की सूची लगाया, अनुमोदित किया, इन्हें कोविड प्रोत्साहन राशि देने का आदेश दिया, खुद प्रोत्साहन राशि लेने के लिये अपना बिल बनाया, अपने बैंक खाता का नम्बर दिया, बिल ट्रेजरी में भेजा. मैंने यह बात भी मुख्यमंत्री को लिखकर दिया. यह भी अख़बार में छपा. इससे बन्ना जी की मानहानि कैसे हो गई ?

    बन्ना गुप्ता को तो पश्चाताप करना चाहिये कि उन्होंने सरकारी तिजोरी से चोरी करने की नीयत से भ्रष्ट आचरण किया. एक मंत्री का दायित्व है कि विभाग में अनियमितताएँ रोके. पर मंत्री ही अनियमितता करने लगे तो इसपर सवाल उठाना और मंत्री के विरूद्ध कारवाई करने लिये मुख्यमंत्री से कहना एक जनप्रतिनिधि का दायित्व है. मैंने इस दायित्व का निर्वहन किया है. इससे मंत्री की मानहानि कैसे हो गई ?

    मैं सारे दस्तावेज न्यायालय के सामने रख दूंगा और पूछूंगा कि श्री बन्ना गुप्ता की सामाजिक-राजनीतिक-प्रशासनिक गतिविधियाँ कैसी रही हैं ? इनका मान-सम्मान का स्तर क्या है ? मेरे वक्तव्य से उनके मान सम्मान में कैसे और कितना कमी हुई है ? उनके आचरण से उनका मान जिस स्तर पर पहुंचा है क्या मेरे बयान से उसके और नीचे जाने की गुंजाईश है ?

    मुझे प्रसन्नता है कि उन्होंने मेरे विरुद्ध मुक़दमा किया है. उन्हें भ्रम है कि यह मुक़दमा मुझे भ्रष्टाचार के विरूद्ध अभियान चलाने से रोक देगा, डरा देगा. मैं कल सरकार से पुछूंगा कि एक मंत्री के कोषांग में कितने कर्मी रखने की सरकार ने अनुमति दिया है. पहले के प्रावधान की तो मुझे जानकारी है. पर क्या श्री हेमंत सोरेन जी की सरकार बनने के बाद इसमें कोई संशोधन हुआ है. यदि नहीं हुआ है तो श्री बन्ना गुप्ता के मंत्री कोषांग में इतनी बड़ी संख्या में कर्मी रखने की इजाजत किसने दी है? इन मंत्रियों का वेतन भुगतान किस शीर्ष से हो रहा है? 

    किसने किया मुकदमा

    बन्ना गुप्ता द्वारा दायर मुक़दमे की जानकारी उनके या उनके वकील द्वारा नहीं बल्कि उनके पीए की प्रेस रिलीज़ से मिली है. किसने मुक़दमा किया है ? मंत्री ने उनके पीए ने या किसी अन्य ने.

    रिपोर्ट: अन्नी अमृता, ब्यूरो हेड, जमशेदपुर


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