दुमका के जंगलों में कौन हर रोज लगा रहा आग ! लाखों का नुकसान, पशु-पक्षी हलकान


दुमका (DUMKA) : गर्मी के दस्तक देते ही दुमका के जंगल में आग लगने की घटना शुरू हो गयी है. यह आग लगती नहीं बल्कि लगायी जाती है. प्राकृतिक संपदा के मामले में दुमका जिला काफी धनी है. लेकिन इन दिनों यहां के जंगलों को असामाजिक तत्वों की बुरी नजर लग गई है. पिछले कुछ दिनों से मसानजोर और शिकारीपाड़ा के जंगलों में शाम होने के बाद आग लगा दी जा रही है. इससे छोटे-छोटे पौधे-झाड़ियां जलकर राख हो जा रही है. वहीं बड़े पेड़ों को भी नुकसान हो रहा है. जंगली जानवर और कीड़े मकौड़े बेमौत मर रहे हैं. अभी पेड़ों में नए- नए पत्ते आए थे लेकिन अगर आप मसानजोर और शिकारीपाड़ा के जंगलों में देखें तो पेड़ के पत्ते आपको जले , सिकुड़े , मुरझाए नजर आएंगे.
लोगों ने ये कहा
मसानजोर क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों से जब बात की गई तो ग्रामीणों ने आग लगने के मामले में अनभिज्ञता जताई. उनका कहना है कि हमें नहीं मालूम कौन आग लगा देता है. वहीं कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्होंने इसे काफी चिंताजनक बताया और रोक लगाने की भी मांग की. कुछ लोगों का कहना है कि जो लोग पहाड़ों पर स्थित महुआ पेड़ से गिरे महुआ को चुनते हैं, वही जंगलों में आग लगाते हैं. ताकि झाड़ियां जलकर राख हो जाए और उसे जगह को साफ कर देने के बाद जो महुआ नीचे गिरे उसे आसानी से उठा सके. लेकिन सूत्र यह भी बताते हैं कि यह लकड़ी माफिया की करतूत है ताकि रात के अंधेरे में निर्भीक होकर पेड़ की कटाई कर सके. मतलब थोड़े से फायदा के लिए वे प्रकृति और पर्यावरण से खिलवाड़ कर रहे हैं. इसे रोकना वन विभाग का दायित्व है. विभाग भी कार्यवाई की बात कहती है लेकिन हर वर्ष इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति होती है तो सवाल उठता है कि कैसी कार्यवाई होती है.
रिपोर्ट : पंचम झा, दुमका
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