राज्य में दो साल में सिर्फ 30 फीसदी डोभा निर्माण, गर्मियों में होगा पानी के लिए हाहाकार


पलामू (PALAMU) : झारखंड में दो साल में सिर्फ 18 हजार डोभा का निर्माण किया गया है. राज्य सरकार ने दो वित्त वर्ष को मिलाकर 64 हजार से अधिक डोभा निर्माण योजना की मंजूरी दी थी. लेकिन अबतक सिर्फ लक्ष्य का 28 फीसदी ही निर्माण पूर्ण हो पाया है.
डोभा निर्माण से भूमिगत जलस्रोत बढ़ेगा
ग्रामीण विकास विभाग ने मनरेगा योजना से वित्तीय वर्ष 2020-21 में 39,085 डोभा निर्माण की स्वीकृति दी गयी थी. वहीं वित्तीय वर्ष 2021-22 में 7013 डोभा निर्माण की मंजूरी दी गयी. स्थिति यह है कि अधिकांश जिलों में 50 फीसदी से कम ही डोभा बन पाए हैं. ऐसे में गर्मी में भी लोगों को डोभा योजना का अधिक लाभ नहीं मिल पाएगा. खेती-बाड़ी के लिए भी पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होगा. बता दें कि राज्य सरकार ने डोभा निर्माण के लिए 2015-17 के बीच इसे अभियान के रूप में शुरू किया. इसे बाद में बढ़ाया गया. वर्षा जल संचयन कर पानी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने की योजना थी. डोभा निर्माण से भूमिगत जलस्रोत बढ़ने के साथ-साथ सिंचाई और जलसंकट से भी निपटने की योजना थी.
इन जिलों की स्थिति सबसे खराब
राज्य में डोभा निर्माण की सबसे खराब स्थिति हजारीबाग, सरायकेला-खरसावां, जामताड़ा, लातेहार, गढ़वा, पाकुड़ सहित 12 जिलों की है, जहां लक्ष्य का 30 फीसदी से नीचे डोभा का निर्माण हो पाया है. ग्रामीण विकास विभाग बार-बार जिलों को निर्देश दे रहा है कि वे समय पर डोभा निर्माण योजना को पूर्ण करें ताकि गर्मी में लोगों को इस योजना का लाभ मिले.
रिपोर्ट : जफ़र महबूब, मेदनीनगर, पलामू
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