ढिबरी युग में झारखंड का यह इलाका, नहीं पहुंची बिजली, शाम होते ही अंधेरे में जीते लोग


गुमला (GUMLA) : किसी गांव में खम्भा लगा तो तार नहीं, कहीं खंभा भी नसीब नहीं. शाम होते होते अंधेरा छा जाता है. हर घर में ढिबरी और लालटेन टिमटिमाते हैं. जंगली जानवरों के डर से खोह में जीवन जिंदगी जीते हैं. जी हां, गुमला के ग्रामीण इलाकों की आज भी यही तस्वीर है. हर गांव में बिजली पहुंचाने का सरकारी दावा खोखला साबित हो रहा है. जहां बिजली है भी वहां ज्यादातर गुल ही रहती. लोगों को आज भी नियमित रूप से बिजली मिलना एक सपना बना हुआ है. इससे ग्रामीणों को तो परेशानी हो ही रही है, खासकर छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रही है. लोगों में आक्रोश है और वे सवाल भी उठा रहे हैं. हालांकि जिला के प्रशासनिक पदाधिकारी जल्द इन मामलों के समाधान का भरोसा दे रहे हैं.
आज भी लोग ढिबरी जला कर करते हैं काम
डुमरी प्रखंड का पकरी टोली गांव में बिजली के स्थान पर केवल खम्भा ही गाड़ा गया. ग्रामीणों की आंख बिजली की आस में पथरायी. 24 घंटे बिजली, हर घर और हर गांव में बिजली पहुंचाने के सरकारी दावे गुमला जिला में खोखली दिखाई पड़ते हैं. धरातल पर देखें तो जिले में कई ऐसे गांव हैं जहां आज भी बिजली की आस में लोगों की आंखें पथरा गई है. कहीं बिजली के खम्भे पहुंचे हैं तो तार नहीं लगी है और तार भी लग गई है तो बिजली आपूर्ति ही प्रारंभ नहीं हुई है. लेकिन डुमरी प्रखंड के अकाशी पंचायत के पकरी टोली गांव के लोगों को बिजली के नाम पर केवल खम्भा ही नसीब हुआ है. जिला मुख्यालय से 80 किमी और प्रखंड मुख्यालय से 12 किमी दूर गांव स्थित है. जहां के करीबन सौ घर पिछले 10 सालों से ढिबरी युग में जीने को विवश हैं. अकाशी पंचायत के पकरीटोली गांव में अब भी बिजली, सड़क, शिक्षा, स्वच्छ पेयजल, रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं. कच्ची सड़कें एवं बंद पड़े चापाकल और बिजली के खड़े खम्भे इस गांव की पहचान सी बन गई है. काफी प्रयास के बाद गांव में कुछ दूर तक पक्की सड़क बनी हुई है. कुछ सड़कें अब भी पक्कीकरण की बाट जो रही हैं. इधर गांव में बिजली नहीं रहने से बच्चों के पठन-पाठन पर बुरा असर पड़ रहा है. गांव के कई बुजुर्गों तो इस आस में ही गुजर गए कि उनके गांव में भी बिजली जल्द ही जले.
शाम होते ही छा जाता अंधेरा
इस संबंध में रोमन लकड़ा का कहना है कि पकरीटोली, करंजटोली, क्रुसडीह, कोरकोटोली गांव में बिजली पहुंचाने को लेकर विभाग को कई बार आवेदन दिया गया. लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिलता रहा बिजली आपूर्ति बाधित होने से इन गांवों के सैकड़ों ग्रामीण ढिबरी और लालटेन युग में जीने को विवश हैं. वहीं ग्रामीण अरविंद तिर्की, संगीता कुजूर, रोमन लकड़ा,किरण लकड़ा,अजीत कुजूर आदि ग्रामीणों ने बताया कि गांव में लगभग सौ घर हैं. जहां वर्षों से बिजली आपूर्ति नहीं होती है. वहीं इन गांव में बिजली नहीं होने के कारण शाम होते ही गांव में अंधेरा छा जाता है. साथ ही जंगली जानवरों का भी खतरा बना रहता है. वहीं बगल के गांव में बिजली जलती है तो लगता है इस गांव के लोगों के लिए बिजली एक सपना बनकर रह गया है.
बिजली विभाग के द्वारा कोई पहल नहीं
बिजली नहीं रहने से बच्चों को रात में पढ़ाई करने के लिए बहुत परेशानी होती है. लालटेन की चिमनी टूट गई जो अब दुकानों में भी नहीं मिलती है. लालटेन या ढिबरी के धुएँ से बच्चों के आंख से जलन होती है, और पानी गिरता है. बच्चों की आंख खराब होने का डर हमेशा बना रहता है. गांव में बिजली के खम्भे गड़े हैं तो कहीं तार लगा हुआ है. ग्रामीणों ने तार चेंज कर केबल तार लगाकर बिजली को सुचारू रूप से चालू करने के लिए बिजली विभाग को कई बार सूचना दी मगर विभाग द्वारा अब तक कोई पहल नहीं की गई. ग्रामीणों ने विद्युत विभाग से पुन: विद्युत बहाल कराने की मांग की है.
डीसी ने कहा-समस्या काफी गंभीर
इस सम्बंध में जब इलाके की एसडीओ प्रीति किस्को से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इस दिशा में कार्रवाई की जा रही है. जल्द ही बिजली की आपूर्ति शुरू हो जाएगी ताकि लोगों को दिक्कत का सामना ना करना पड़े. वहीं जिला के डीसी सुशांत गौरव ने कहा कि निश्चित रूप से यह समस्या काफी गंभीर है. बिजली विभाग से बातचीत चल रही है. साथ ही उन्होंने कहा कि पाट इलाकों में बिजली पहुंचाने में दिक्क्त होती है. वहां के लिए सोलर से बिजली की आपूर्ति नियमित रूप से करवाने की दिशा में काम चल रहा है. जल्द ही लोगों की समस्या का समाधान हो जाएगा.
रिपोर्ट : सुशील कुमार, गुमला
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