पारंपरिक परिधान और पूजा-अर्चना के साथ संथालियों ने मनाया बाहा पर्व, अराध्य देव पर चढा़ाया सखुआ का फूल

    पारंपरिक परिधान और पूजा-अर्चना के साथ संथालियों ने मनाया बाहा पर्व, अराध्य देव पर चढा़ाया सखुआ का फूल

    दुमका (DUMKA) - भारत को त्योहारों का देश कहा जाता है. विभिन्न राज्यों में समय-समय पर कई तरह के त्यौहार मनाए जाते हैं. झारखंड की उपराजधानी दुमका और संथाल परगना प्रमंडल में होली के अवसर पर संथाल समुदाय द्वारा एक अद्भूत त्योहार मनाया जाता है. जिसका नाम है बाहा.

    साल का पहला त्योहार

    संथाल समाज के लोग बाहा को साल का पहला त्योहार मानते हैं. मांझी थान में परंपरागत तरीके से पूजा-अर्चना होती है. परंपरागत पहनावा में संथाल समाज के लोग नृत्य करते हैं. सखुआ और महुआ के फूल का इस त्यौहार में विशेष महत्व है. मांझी थान में नाइकी इसे प्रसाद स्वरूप लोगों को देते हैं. पुरुष जहां इसे अपने कानों पर रखते हैं वहीं महिलाएं अपनी जुड़ा में लगाती है. इस पूजा में बलि की प्रधानता रहती है. सभी लोग बैठ कर प्रसाद ग्रहण करते हैं. इसके बाद नाइकी के पीछे पीछे गांव जाते हैं और वहां एक दूसरे पर पानी छिड़क कर बाहा त्योहार मनाते हैं. होली में जहां रंगों की प्रधानता है वही बाहा त्योहार में रंग का उपयोग नहीं होता है.

    अराध्य देव पर चढ़ाते है मौसम के नए फूल

    बसंत ऋतु में पेड़ पौधों में नए फूल और पत्ते आने लगते है. ऐसें में उनके स्वागत के लिए अदिवासी समाज बाहा पर्व मनाते है. जिसमें ये लोग नए फूल को अपने अराध्य देव पर चढ़ाते हुए उनकी पूजा करते है. बाहा पर्व प्रकृति से जुड़ा पर्व है. जिसमें नए फूल औऱ पत्तों को भगवान को अर्पित किया जाता हैं. अदिवासी समाज की माने तो वो लोग नए मौसम के फलों का सेवन तब तक नहीं करते हैं, जब तक वो बाहा का पर्व नहीं मना लेते.    

    रिपोर्ट पंतम झा, दुमका

     


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