" झारखंड भाषायी अल्पसंख्यकों का राज्य है, यहां कोई भी भाषा बहुसंख्यक नहीं"

    " झारखंड भाषायी अल्पसंख्यकों का राज्य है, यहां कोई भी भाषा बहुसंख्यक नहीं"

    जमशेदपुर (JAMSHEDPUR) - झारखंड में जेएमएम के नेतृत्व में गठबंधन सरकार पॉलिसी पैरालिसिस (नीति पक्षाघात) से पीड़ित है.  झारखंड के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर दिनेश कुमार षाड़ंगी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके ये बात कही है. उन्होंने कहा है कि  बीते 25-26 महीने से चल रही झामुमो गठबंधन सरकार एक प्रकार की नीति पक्षाघात से पीड़ित है और झारखंड को "Banana Rebuplic"बना रही है. राज्य में कानून  व्यवस्था नाम की कोई चीज़ नहीं है. राम भरोसे विधि व्यवस्था चल रही है. एक के बाद एक सरकार के निर्णय को संविधान के विरूद्ध होने के कारण हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है, चाहें नियुक्ति नियमावली का मामला हो,स्थानीयता नीति हो  या कुछ और. 

    झारखंड को गृहयुद्ध की आग में धकेलने का काम

    क्षेत्रीय भाषा के मामले में राज्य सरकार ने झारखंड को गृहयुद्ध की आग में धकेलने  का काम किया है.  सरकार के एक एक मंत्री अलग अलग बयान दे रहे हैं. दिनेश षाड़ंगी ने झारखंड की भाषाओं के संदर्भ में अहम तकनीकी जानकारी देते हुए बताया है कि झारखंड भाषायी अल्पसंख्यकों का राज्य है. यहां कोई एक भाषा बहुसंख्यक नहीं है. यहां की दो क्षेत्रीय भाषाएं बांग्ला और उड़िया संविधान की आठवीं अनुसूची में दर्ज़ है. यहां अलग अलग जिलों में अलग अलग भाषाएं बोली जाती हैंं. पूर्वी सिंहभूम, धनबाद, जामताड़ा, साहेबगंज, दुमका और राजमहल में बांग्लाभाषियों की संख्या अधिक है. वहीं पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसांवा, सिमडेगा और खूंटी में उड़िया भाषियों की संख्या ज्यादा है. वहीं मैथिली देवघर, गढ़वा और गोड्डा के बहुसंख्यकों की भाषा है. पलामू, खढ़वा और कोयलांचल में भोजपुरी और मगही बहुतायत बोली जाती है. झारखंड आंदोलन में इन सभी भाषा भाषियों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया था. विविधता में एकता ही हमारी संस्कृति है लेकिन सरकार विद्वेष फैला रही है. भोजपुरी और मगही को वापस लेने की मांग ही बेतुकी है. 

    TAC के मामले में पूर्व और वर्तमान राज्यपाल ने पांचवी अनुसूची के तहत राज्यपाल के अधिकारों पर अतिक्रमण बताया है. रही सही कसर सरकार द्वारा शराब बेचने के निर्णय ने पूरा कर दिया है. महात्मा गांधी के नशा निवारण का सिद्धांत तथा दिशोम गुरु शिबू सोरेन के  नशा मुक्त झारखंड का सपना उनके ही राजनीतिक उत्तराधिकारी ने ध्वस्त कर दिया है.  उन्होंने राज्य सरकार को आत्म निरीक्षण करने की अपील की है तथा केंद्र सरकार को इन सारे विषयों का संज्ञान लेने की मांग की है. 

    रिपोर्ट : अन्नी अमृता, ब्यूरो हेड, जमशेदपुर 

     


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