पीरिएड्स पर comic बुक्स हुई launch : पीरिएड्स को कहिए जोहार, बेटियों का करें सहयोग

    पीरिएड्स पर comic बुक्स हुई launch : पीरिएड्स को कहिए जोहार, बेटियों का करें सहयोग

    जमशेदपुर(JAMSHEDPUR)- पीरिएड्स यानि माहवारी एक ऐसा विषय है जिस पर पिछले कुछ समय से थोड़ी चुप्पी टूटी है, लेकिन अब भी ये एक सहज विषय नहीं बन पाया है. जिस वजह से ये दुनिया चल रही है, जिस वजह से औरत मां बन पाती और ये सृष्टि चलती है वो आज भी शर्म का ही विषय है. जाने अनजाने बचपन से ही इसको लेकर संकोच और हीनभावना भर दी जाती है. यही वजह है कि राष्ट्रीय स्तर की संस्था मेंस्ट्रूपीडिया menstrupedia ने नाम्या फाऊंडेशन के साथ मिलकर नैशनल गर्ल चाईल्ड डे पर  पीरिएड्स को समर्पित comic books सह केंपेन--#जोहार पीरिड्स की आज जमशेदपुर के सेक्रेड हार्ट कान्वेंट में  launching की.

    इस कार्यक्रम में boxer अरूणा मिश्रा और पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए. वहीं नाम्या फाऊंडेशन की तरफ से डा. श्रद्धा सुमन, निकिता मेहता, निधि केडिया और अन्य लोग उपस्थित थे. निजी स्कूलों के साथ साथ ये कार्यक्रय सरकारी स्कूलों में भी चलाया जाएगा. फिलहाल झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में ये कार्यक्रम चलेगा. अगर राज्य का सहयोग मिला तो संस्था अन्य जगहों पर भी जागरुकता फैलाएगी.

    comic books के माध्यम से पुरुष भी पीरिएड्स को लेकर होंगे familier

    कोरोना गाइडलाइन्स की वजह से छात्राएं उपस्थित नहीं रहीं लेकिन उन्हें स्कूल की ओर से बुक्स online उपलब्ध कराया जाएगा. इस comic books के माध्यम से छात्राएं पीरिएड्स के विभिन्न पहलुओं, समस्याओं और निदान के प्रति जागरूक होंगी. साथ ही ये comic books पुरुषों को भी जागरूक करेंगे कि वे पीरिएड्स को लेकर महिलाओं-बच्चियों के प्रति संवेदनशील बनें. वे पीरिएड्स को लेकर महिलाओं के कष्ट को समझकर उनकी मदद और सहयोग करें.

    पीरिएड्स को अपराध के तौर पर न देखें 

    कई बार अचानक पीरिएड्स आने पर महिलाएं या बच्चियां शर्मिंदगी की शिकार हो जाती हैं. ये बुक्स इस विषय पर भी समाज को जागरूक करता है कि असहज महसूस कर रही महिला या बच्ची की खिल्ली उड़ाने की जगह सहयोग करें. पीरिएड्स को अपराध के तौर पर न देखें क्योंकि पीरिएड्स है तब ही हमारा अस्तित्व है. संस्था का मानना है कि स्कूल के दिनों से ही छात्र और छात्राएं, दोनों को जागरूक करने से पीरिएड्स को लेकर एक संवेदनशील समाज की नींव रखी जा सकती है जहां पुरुष शुरू से ही महिलाओं के पीरिएड्स के प्रति सहयोग सीखेगा जो जीवनपर्यंत चलेगा.

    रिपोर्ट: अन्नी अमृता, ब्यूरो हेड, जमशेदपुर  


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