अतिक्रमण पर चला रेलवे का बुलडोजर, बढ़ेगी ट्रेन की रफ्तार

    अतिक्रमण पर चला रेलवे का बुलडोजर, बढ़ेगी ट्रेन की रफ्तार

    धनबाद (DHANBAD) :  तमाम विरोध के बावजूद धनबाद रेल प्रशासन ने सोमवार से रेल लाइन के अगल-बगल के इलाकों से अतिक्रमण हटाना शुरू कर दिया है. रेल लाइन के दोनों ओर बॉउंड्री बनाने की रेलवे की योजना है. अतिक्रमण हटाने का काम वासेपुर इलाके से शुरू किया गया है. 20 दिन पहले रेलवे ने इलाके में मुनादी कराकर लोगों को स्वयं अतिक्रमण हटा लेने का अनुरोध किया था. लेकिन रेलवे की इस मुनादी का लोगों पर कोई असर नहीं हुआ. नतीजतन रेलवे लाइन के अगल-बगल अतिक्रमण कर दुकान आदि बना ली गईं हैं. बैंकमोड़ जाने के लिए नजदीक का रास्ता होने के कारण लोग बेधड़क लाइन पार करते हैं. ऐसे में ट्रेनों के गुजरने से हादसे भी होते रहते हैं.

    बनानी है लंबी चौड़ी बॉउंड्रीवॉल

    हादसों को रोकने के लिए रेलवे बॉउंड्रीवाल बनाने जा रहा है. हालांकि, रेलवे की मुनादी के बाद काफी विरोध हुआ.  कांग्रेस के वरीय नेता मन्नान मलिक सहित कई लोगों ने डीआरएम से मुलाकात की और लोगों की भावनाओं से अवगत कराया. इसका भी रेलवे पर कोई असर नहीं हुआ और आज से रेलवे ने जेसीबी लगाकर अतिक्रमण हटाने का काम शुरू कर दिया है. 15 दिन पहले रेलवे ने ट्रैक के दोनों किनारे की मापी कराई थी. इस दौरान तकरीबन 75 लोग ऐसे पाए गए थे जिन्होंने रेलवे की जमीन पर निर्माण कर लिया था.

    रेलवे के नोटिस का भी नहीं हुआ असर

    रेलवे ने सभी अतिक्रमण कर्ता को नोटिस भेजकर जमीन खाली करने का अल्टीमेटम दिया. बाद में मुनादी भी शुरू की गई. इसके बावजूद लोगों ने रेलवे की जमीन खाली नहीं की. हावड़ा-नई दिल्ली रेल मार्ग पर 2024 तक 160 की रफ्तार से राजधानी और दुरंतो जैसी ट्रेन चलाई जाएंगी. ट्रेनों की रफ्तार बढ़ने से हावड़ा से नई दिल्ली का तकरीबन 17 घंटे का सफर 12 घंटे में ही पूरा हो जाएगा. ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने के साथ ही रेलवे ट्रैक को भी सुरक्षित करना जरूरी है. इसके मद्देनजर धनबाद रेल मंडल प्रधानखंता से बंधुआ तक रेलवे लाइन के दोनों किनारे 200 किलोमीटर लंबी दीवार खड़ी कर रहा है. कई जगहों पर दीवार निर्माण का काम भी शुरू हो चुका है. रेलवे के प्रोजेक्ट के दायरे में धनबाद शहर के रांगाटांड से वासेपुर और भूली तक का क्षेत्र भी है. इधर आम लोग भीषण ठंड की दुहाई देते हुए रेलवे से अविलम्ब अतिक्रमण हटाओ अभियान बंद करने की मांग कर रहे हैं. ख़ासतौर से बिना पुनर्वास के आशियाना उजाड़ने से कई परिवार सड़क पर आ गए हैं. इधर रेलवे अब ज्यादा समय देने के मूड में नहीं दिख रहा है.

    रिपोर्ट: अभिषेक कुमार सिंह, ब्यूरो हेड(धनबाद)


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