खूंटी में फिर सजा अखरा, रासकरम में पारंपरिक आदिवासी गीत-संगीत

    खूंटी में फिर सजा अखरा,  रासकरम में पारंपरिक आदिवासी गीत-संगीत

    खूंटी(KHUNTI): रासलीला की स्मृतियां आदिवासी बहुल क्षेत्र में आज भी देखने को मिलती है. गांवों में खेतीबारी के काम खत्म होने के बाद लोग रासकरम का आयोजन करते है. रासकरम कार्यक्रम की शुरूआत खूंटी सदर प्रखंड के गटीगड़ा गांव के चट्टाबुरू में लगे मेले से की गयी. मेले के आयोजन के पूर्व रासकरम के अखरा को आकर्षक ढ़ंग से सजाया गया. रंग-बिरंगे वस्त्र धारण कर आदिवासी समुदाय के लोग पहुंचे और अखरा में नाच-गान किया. रास करम में स्थानीय विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए. उन्होंने अपने संबोधन में रास करम की परंपरा को याद दिलाई. उन्होंने कहा कि खेती-बारी के बाद हर गांव के अखरा को सजाकर रासकरम मनाने की परंपरा रही है. गटीगड़ा गांव के लोगों के द्वारा इस परंपरा को बचाये रखने के लिए धन्यवाद दिया. रासकरम कार्यक्रम  में बिरसा मुंडा, विकास मुंडा, मुचिराय मुंडा, बुद्धु मुंडा, जाटे मुंडा, मधु टुटी, लुखी पाहन, काशीनाथ महतो, विनोद नाग, कैलाश महतो, राजेश महतो, कलींदर राम, लोदरो मुंडा, राजेश नाग समेत गांव के सैकड़ों ग्रामीण शामिल हुए.

    रिपोर्ट : समीर हुसैन (रांची डेस्क )


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