सिम किसी और के नाम का, गाड़ी दूसरों के नाम पर रजिस्टर्ड....गैंग्स ऑफ़ वासेपुर के रोज नए खुलासे

    सिम किसी और के नाम का, गाड़ी दूसरों के नाम पर रजिस्टर्ड....गैंग्स ऑफ़ वासेपुर के रोज नए खुलासे

    धनबाद (DHANBAD) के माफिया की बात करिए या फिर गैंग्स ऑफ़ वासेपुर के किरदारों की. चमचमाती गाड़िओं का काफिला हो या कीमती मोबाइल, सब दूसरों के नाम के होते हैं. पुलिस की कार्रवाई में इस बात का खुलासा होता रहा है. वासेपुर के बहुचर्चित नन्हे हत्याकांड के बाद भी कुछ इसी तरह का खुलासा हुआ है. धनबाद पुलिस बिहार से एक को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है. आरोप है कि इसके नाम से निर्गत सिम का उपयोग गैंग्स के लोग कर रहे हैं.

    कीमती गाड़ियां रहती हैं किसी और के नाम से रजिस्टर्ड

    इतना ही नहीं, यह भी बात सामने आ चुकी है कि  गैंग्स या माफिया ,जो कीमती गाड़ियां प्रयोग में लाते  हैं, वह भी किसी दूसरे के नाम से रजिस्टर्ड होती है. कोयला किंग सुरेश सिंह की हत्या के बाद जिस पजेरो गाड़ी से शशि सिंह के भागने का आरोप है ,वह गाड़ी भी किसी दूसरे के नाम पर रजिस्टर्ड थी. सुरेश सिंह की हत्या 7 दिसंबर 2011 को धनबाद क्लब में कर दी गई थी. हत्या का आरोप सिंह मेन्शन के रामधीर सिंह के पुत्र शशि सिंह पर है.  इधर यह भी खुलासा हुआ है कि  नन्हे खान की हत्या के बाद फाइनेंस कंपनी के एजेंट ने जो गाड़ियां  कब्जे में ली है, वह भी दूसरो के नाम से रजिस्टर्ड थी .

    गाड़ी, हथियार और पहलवानों का  कॉम्बिनेशन

    बता दें कि चमचमाती गाड़ियों, हथियार या फिर मशल मैन दिखा कर लोगों को डरना, धमकाना दबंग आसान समझते हैं. इसका लाभ भी मिलता है. अगर पुलिस कार्रवाई होती भी है तो फ़ायदा कुछ खास नहीं होता.  बस जिनके नाम पर गाडिया होती हैं या जो आपने नाम का सिम इन्हें देते हैं, पहले पुलिस उन्हीं को टारगेट करती है. उल्लेखनीय है कि कोयलांचल में कोयले में वर्चस्व को लेकर हत्याऐं होती रही हैं. बम फटते रहे हैं, लेकिन अब नया ट्रेंड सामने आया है. जिसमें आउटसोर्सिंग पर कब्ज़ा करो और आराम की जिंदगी जिओ सोच कर जमीन पर कब्ज़ा किया जाता है.

    रिपोर्ट : सत्यभूषण सिंह


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