अपराध में घुसा तो माफिया डॉन बन गया,राजनीति में आया तो नेता बन गया,कुछ ऐसा था मुख्तार अंसारी का इतिहास 

    अपराध में घुसा तो माफिया डॉन बन गया,राजनीति में आया तो नेता बन गया,कुछ ऐसा था मुख्तार अंसारी का इतिहास 

    धनबाद(DHANBAD): पूर्वांचल का बाहुबली मुख्तार अंसारी अब इस दुनिया में नहीं रहा. गुरुवार की रात बांदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उसकी मौत हो गई .मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया है. लेकिन यह वह शख्स था जो राजनीति में प्रवेश किया तो नेता बन गया और अपराध में घुसा तो माफिया डॉन बन गया. केवल पूर्वांचल ही नहीं, अगल-बगल के इलाकों में भी इसकी तूती बोलती थी. अपराध की दुनिया का यह बेताज बादशाह बताया जाता था. किसी को डराने धमकाने के लिए मुख्तार अंसारी का नाम ही काफी था. यह अलग बात है कि प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से धनबाद कोयलांचल से भी ऐसे बाहुबलियों का संबंध बना रहता था. खासकर सूर्य देव सिंह के निधन के बाद बिहार के बाहुबली हो अथवा उत्तर प्रदेश के, कोयलांचल पर नजर लगाए रहते थे. यह अलग बात है कि कोयले के कारोबार को लेकर यह सब होता था.

    लोग तो यह भी बताते हैं कि धनबाद कोयलांचल से वसूली गई रंगदारी की राशि उत्तर प्रदेश सहित बिहार के बाहुबलियों तक पहुंचती थी. उसमें मुख्तार अंसारी का नाम भी लिया जाता था. उस समय रैक से कोयले की ढुलाई की परिपाटी थी. रैक से कोयले की ढुलाई में  आमदनी को लेकर धनबाद में भी मार काट मची रहती थी. कई लोगों की लाशें गिर चुकी थी. लोग बताते हैं कि मुख्तार अंसारी का अपराध की दुनिया में नाम सबसे पहले 1988 में आया. उसके बाद 1990 के आसपास ब्रजेश सिंह गैंग से इसकी आदत शुरू हुई. फिलहाल उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय के भाई अवधेश राय की हत्या में भी मुख्तार अंसारी का नाम आया था. यह हत्या 1991 में की गई थी. अपराध की दुनिया की जानकारी रखने वाले  बताते हैं कि 1997 में एक कोयला कारोबारी के अपहरण के बाद मुख्तार अंसारी का नाम अपराध की दुनिया में छा गया था.

    एक घटना की लोग जिक्र करते हैं और बताते हैं कि 2004 में जब मुख्तार अंसारी विधायक बन गया था, उस वक्त भाजपा विधायक कृष्णा नंद राय के साथ आमने-सामने भिड़ंत हुई थी. सैकड़ो राउंड गोलियां चली थी. लेकिन दोनों बच गए. लेकिन इसके बाद से ही यह अंदेशा लगाया जाता रहा कि कृष्णानंद राय पर कभी भी हमला हो सकता है. इस बीच मुख्तार अंसारी किसी मामले में जेल चला गया और 2005 में भाजपा विधायक कृष्ण नंद राय की हत्या हो गई. यह हत्या भी लोगों को खूब चौंकाया. इस हत्याकांड को लोग 2004 की घटना से जोड़ते रहे. धनबाद के पुराने लोग यह भी बताते हैं कि दबंगता कायम करने के लिए कृष्णानंद राय की हत्या की गई. धनबाद में तो उस समय  चर्चा हुई थी कि धनबाद से रैक से किसी का जाने वाले कोयले का काम कृष्णानंद राय देखते थे और कोयले की आमदनी की अदावत में ही कृष्णा नंद राय की हत्या हुई थी. जो भी हो लेकिन कृष्णानंद राय की हत्या के बाद मुख्तार अंसारी का मनोबल सातवे आसमान पहुंच गया. लेकिन 28 मार्च की रात काल ने उसे घेर लिया और कॉर्डियल अरेस्ट से उसकी मौत होने की बात कही जा रही है.  मुख्तार अंसारी की मौत के बाद उत्तर प्रदेश की पुलिस अलर्ट मोड पर है.

    रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो 


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