हिड़मा की तुलना बिरसा मुंडा से,सदन में सांसद ने कहा आने वाली पीढ़ी क्रांतिकारी के रूप में जानेगी


रांची(RANCHI): हिडमा मारा गया लेकिन अब भी हिडमा की आवाज कई जगह पर गूंज रही है. एक तबका हिडमा को क्रांतिकारी बताने में जूटा है तो दूसरी तरफ हिडमा को कुख्यात नक्सल और समाज का दुश्मन बताया जा रहा है. अब लोकसभा में हिडमा की आवाज गूंज गई. जिसमें एक माननीय ने सदन में आदिवासी की बात करते हुए कहा कि आज का हिडमा कल के युवाओं के लिए क्रांतिकारी के नाम से जाना जाएगा. यह सोचना होगा की आखिर आदिवासी हथियार क्यों उठा रहा है.
बता दे कि लोकसभा के सदस्य राज कुमार रौत ने कहा कि देश के आत्म निर्भर की बात कर रहे है लेकिन आदिवासी दलित को पीछे छोड़ कर आत्म निर्भरनहीं बन सकते है. आज 150 बिरसा मुंडा जयंती मनाई जा रही है. लेकिन बिरसा मुंडा कौन थे वह जल जंगल जमीन की लड़ाई लड़ते थे. और अंग्रेजों के लिए वह देश द्रोही थी आज का हिडमा भी आने वाले पीढ़ी के लिए क्रांतिकारी हो सकता है वह आपकी नजर में नक्सली है.
उन्होंने कहा कि यह सोचना होगा की आखिर आदिवासी हथियार क्यों उठा रहा वह कलम क्यों नहीं पकड़ रहा है. ऐसे में उन्होंने कहा कि अब समय वह नहीं है बंदूक नहीं कलम के साथ अपनी लड़ाई लड़नी होगी. और आदिवासी के हक और अधिकार के लिए सब को आगे आना होगा. लेकिन जिसे केंद्र सरकार नक्सली बता रही है वह देश के जल जंगल जमीन का असली मालिक है और वह अपनी लड़ाई लड़ रहा है.
ऐसे में इस बयान से पहले छत्तीसगढ़ में जब आदिवासी स्थानीय लोगों ने भूमकाल दिवस में जब जश्न मनाया गया इसमें भी हिडमा का गाना बजा और इसपर लोग झूमते दिखे. यहां पर पुलिस की मौजूदगी भी थी इसके बावजूद किसी को कोई डर नहीं है.
यह तमाम तस्वीर और बयान बताने को काफी है कि नक्सल खत्म हो जाएंगे लेकिन विचारधारा इनकी समाज के अंदर तक फैल चुकी है. जिसे खत्म करने के लिए समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों तक सरकार और शासन को पहुंचना होगा. एक विश्वास की जरूरत है. जहां नक्सल विचारधार की बात ना हो कर गांधी और लोकतंत्र की बात हो.
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