बड़ी खबर : झारखंड में SIR की दस्तक, अप्रैल में शुरू होगी प्रक्रिया, 22 राज्यों में होगा स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन


टीएनपी डेस्क (TNP DESK): चुनाव आयोग ने देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान चलाया है. बिहार, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में यह प्रक्रिया पहले ही कराई जा चुकी है. अब इसी क्रम में आयोग ने मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए हैं.
आयोग ने झारखंड समेत कुल 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की प्रक्रिया जल्द पूरी करने को कहा है. इन राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को आवश्यक तैयारियां शीघ्र शुरू करने और निर्धारित समयसीमा में कार्य पूरा करने का निर्देश दिया गया है.
जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश भेजे गए हैं, उनमें झारखंड, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, लद्दाख, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, दिल्ली, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, त्रिपुरा, तेलंगाना और उत्तराखंड शामिल हैं.
SIR का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची में दर्ज हो और कोई भी योग्य मतदाता अपने अधिकार से वंचित न रहे. आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन राज्यों में अभी यह प्रक्रिया शेष है, वे अप्रैल 2026 से प्रस्तावित अभियान के लिए अपनी तैयारियां अभी से प्रारंभ कर दें.
इस विशेष पुनरीक्षण अभियान के तहत मतदाता सूची में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे. नए मतदाताओं का पंजीकरण होगा, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जाएंगे और त्रुटियों को सुधारा जाएगा. आयोग ने इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है, जिसमें प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन, दावे और आपत्तियां आमंत्रित करना तथा अंतिम सूची का प्रकाशन शामिल है.
चुनाव आयोग के अनुसार, पूरे देश में SIR लागू करने का निर्णय पिछले वर्ष जून 2025 में लिया गया था. इन 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रक्रिया पूरी होने के बाद देश के सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इस दायरे में आ जाएंगे. असम में SIR के स्थान पर विशेष पुनरीक्षण कराया गया था, जो 10 फरवरी को पूरा हो चुका है.
आयोग का मानना है कि इस व्यापक अभियान से मतदाता सूची अधिक पारदर्शी, त्रुटिरहित और विश्वसनीय बनेगी, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मजबूत होगी.
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