झारखंड में PESA लागू होते ही बदला सत्ता का समीकरण! जानिए पंचायत चुनाव पर क्या पड़ेगा असर

    झारखंड में PESA लागू होते ही बदला सत्ता का समीकरण! जानिए पंचायत चुनाव पर क्या पड़ेगा असर

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK): झारखंड में आखिरकार पेसा कानून (PESA Act) लागू कर दिया गया है. इसके साथ ही आदिवासी बहुल इलाकों में गांव की सरकार यानी ग्राम सभा और पंचायत की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गई है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि PESA लागू होने के बाद झारखंड में पंचायत चुनाव कैसे होंगे और ग्राम सभा का नया स्वरूप क्या होगा? आइए आसान भाषा में समझते हैं.

    PESA लागू होते ही अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा को सबसे बड़ा और निर्णायक निकाय बना दिया गया है. अब गांव से जुड़े अहम फैसले चाहे पंचायत चुनाव हों या विकास योजनाएं सबमें ग्राम सभा की भूमिका सबसे ऊपर होगी. यानी अब सीधे तौर पर गांव के लोग ही फैसलों की दिशा तय करेंगे.

    अध्यक्ष और सदस्यों का चुनाव कैसे होगा?

    ग्राम सभा के अध्यक्ष यानी मुखिया या प्रधान का चुनाव अब परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार किया जाएगा. यह प्रक्रिया आम पंचायत चुनावों से अलग होगी और पूरी तरह गांव की परंपरा और सामाजिक व्यवस्था पर आधारित होगी.

    ग्राम सभा की बैठकों का नया नियम

    अब हर ग्राम सभा को महीने में कम से कम एक बैठक करना अनिवार्य होगा. बैठक की तारीख, समय और स्थान गांव की परंपरा के मुताबिक तय किए जाएंगे. बैठक की अध्यक्षता ग्राम प्रधान करेंगे और फैसले आपसी सहमति से लेने की कोशिश की जाएगी.

    पंचायत चुनावों पर क्या पड़ेगा असर?

    पंचायत चुनाव पहले की तरह होंगे, लेकिन आदिवासी इलाकों में ग्राम सभा के फैसले ज्यादा प्रभावशाली होंगे. इसका मतलब यह नहीं है कि चुनाव रद्द कर दिए जाएंगे, बल्कि चुनाव के बाद लिए जाने वाले बड़े फैसलों में ग्राम सभा की मंजूरी जरूरी होगी.

    पारंपरिक नेतृत्व को मिलेगी नई ताकत

    अब छोटे-छोटे टोला या बस्तियां अपनी अलग ग्राम सभा और मुखिया चुन सकेंगी. इससे पारंपरिक नेतृत्व को पंचायत व्यवस्था के भीतर और ज्यादा मजबूती मिलेगी और स्थानीय पहचान भी बनी रहेगी.

    ग्राम सभा को मिले नए अधिकार

    PESA के तहत अब ग्राम सभा को जल, जंगल, जमीन और खनन जैसे प्राकृतिक संसाधनों पर फैसला लेने का अधिकार मिल गया है. साथ ही विकास योजनाओं की निगरानी भी ग्राम सभा ही करेगी.

    इतना ही नहीं, स्थानीय विवादों को सुलझाने का अधिकार भी ग्राम सभा को दिया गया है. इसके तहत ग्राम सभा ₹2,000 तक का जुर्माना भी लगा सकेगी. यानी अब पंचायत प्रधान या पंच ग्राम सभा की सहमति के बिना कोई बड़ा फैसला नहीं ले पाएंगे.

    विकास योजनाओं में अब गांव की सीधी भागीदारी

    • गांव की वार्षिक विकास योजनाएं अब ग्राम सभा की सलाह से तैयार होंगी. इससे पंचायत चुनाव के बाद भी फैसलों में स्थानीय लोगों की आवाज साफ तौर पर दिखाई देगा.
    • आदिवासी अधिकारों की दिशा में इसे एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है. हालांकि कुछ विपक्षी नेताओं ने नियमावली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह PESA की मूल भावना से भटकती हुई नजर आती है.
    • कुल मिलाकर, झारखंड में PESA लागू होने के बाद पंचायत चुनाव तो होंगे, लेकिन असली ताकत अब ग्राम सभा के हाथ में होगी. चुनाव के बाद भी गांव की सरकार सीधे जनता की आवाज बनेगी और स्थानीय शासन में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.

     


    the newspost app
    Thenewspost - Jharkhand
    50+
    Downloads

    4+

    Rated for 4+
    Install App

    Our latest news