पारसनाथ की पहाड़ी को लेकर फिर आमने-सामने की तकरार, आदिवासी संगठन और जैन धर्मावलंबियों ने खोला एक दूसरे खिलाफ मोर्चा

    पारसनाथ की पहाड़ी को लेकर फिर आमने-सामने की तकरार, आदिवासी संगठन और जैन धर्मावलंबियों ने खोला एक दूसरे खिलाफ मोर्चा

    रांची(RANCHI): पारसनाथ की पहाड़ी पर अपने-अपने दावे को लेकर एक फिर से आदिवासी संगठनों और जैन धर्मालम्बियों के बीच तकरार की स्थिति कायम हो गयी है.

    विश्व जैन संगठन ने सालखन मुर्मू के बयान पर कड़ा एतराज जताते हुए जैन धर्मावलम्बियों से सालखन मुर्मू के खिलाफ देश के हर थाने में प्राथमिकी दर्ज करवाने का आह्रवान किया है. इसके जवाब में आदिवासी सेंगेल अभियान के संयोजक और पारसनाथ की पहाड़ी पर आदिवासियों का अधिकार को लेकर आन्दोलनरत सालखन मुर्मू ने भी पांच राज्यों में फैले अपने समर्थकों से विश्व जैन संगठन के प्रतिनिधियों का पुतला दहन करने और उनके खिलाफ एससी-एसटी अत्याचार अधिनियम- 1989 के तहत  प्राथमिकी दर्ज करवाने का फरमान सुना दिया है.

    बाबरी का हाल करने के बयान पर मचा तूफान

    यहां बता दें कि इसके पहले सालखन मुर्मू ने कहा था कि यदि पारसनाथ की पहाड़ी को आदिवासियों को नहीं सौंपा गया तो पारसनाथ की पहाड़ी पर स्थित जैन मंदिरों का भी वही हाल होगा जो बाबरी मस्जिद का हुआ था.

    सालखन मुर्मू का कहना है कि पारसनाथ की चोटी पर मरांग बुरु का स्थल है. उनका कहना है कि हम किसी भी कीमत पर आदिवासी के पूजा स्थल को जैनियों को नहीं सौंप सकते.

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर आदिवासी भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप

    सालखन मुर्मू ने इस मामले में राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी निशाने पर लेते हुए कहा था कि हेमंत सरकार को इस बात का जवाब देना चाहिए कि किस आधार पर उनके द्वारा आदिवासियों के पूजा स्थल को जैनियों का धर्मस्थल बतलाया गया.

    कहां से शुरु हुई यह विवाद

    दरअसल जब जैन धर्मावलम्बियों के द्वारा पारसनाथ की पहाड़ी को पर्यटक स्थल बनाने का विरोध किया गया था, तब सीएम हेमंत ने इस पूरे विवाद के लिए केन्द्र सरकार की एक अधिसूचना को जिम्मेवार बताया था, जिसमें पारसनाथ की पहाड़ी को इको संसेटिव जोन के दायरे में लाते हुए पर्यटक स्थल की सूची में शामिल कर दिया गया था.

    जैनियों के विरोध के बाद राज्य की हेमंत सरकार ने पारसनाथ की पहाड़ी को जैनियों का धर्मस्थल करार दिया था, जिसके बाद से ही पूरे राज्य में आदिवासी संगठन विरोध में उतर गयें.  

    पारसनाथ हमारा, केंद्र करें हस्तक्षेप

    इस मामले में सालखन मुर्मू ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि आदिवासियों के मरांग बुरू (भगवान) जैनों के कब्जे में हैं. और जैनियों के द्वारा सीएनटी,एसपीटी एक्ट और वन एवं भूमि संरक्षण कानूनों का उल्लंघन पारसनाथ की पहाड़ियों पर अवैध निर्माण किया गया है. सालखन मुर्मू ने केन्द्र सरकार से आदिवासियों के भगवान मरांग बुरु आदिवासियों को सौंपने का आग्रह किया है.

    रिपोर्ट: देवेन्द्र कुमार 


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