कल सेवानिवृत हो रही हैं DGP तदाशा मिश्रा, आज शाम तक आ सकता है नया नाम
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टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : राज्य की पुलिस व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक बदलाव होने जा रहा है. वर्तमान पुलिस महानिदेशक (DGP) तदाशा मिश्रा कल अपने पद से सेवानिवृत्त हो रही हैं. उनके सेवानिवृत्त होने के साथ ही नए DGP की नियुक्ति को लेकर हलचल तेज हो गई है. अब सभी की निगाहें राज्य सरकार के फैसले पर टिकी हैं, जिसे लेकर संभावना जताई जा रही है कि आज देर शाम तक आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी. इसके लिए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों पर मंथन चल रहा है और अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री स्तर पर लिया जाना है. गृह विभाग ने नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं. तदाशा मिश्रा के कार्यकाल को प्रशासनिक सुधारों, कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और पुलिस आधुनिकीकरण के प्रयासों के लिए जाना जाता है. उनके नेतृत्व में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए, जिनका असर जमीनी स्तर पर देखने को मिला. नए DGP के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ आगामी चुनौतियों, जैसे साइबर अपराध, संगठित अपराध और पुलिस बल के प्रशिक्षण को और प्रभावी बनाने की जिम्मेदारी होगी.
हेमंत सोरेन सरकार डीजीपी नियुक्ति की अपनी तय नियमावली के तहत ही नए डीजीपी का चयन करेगी. इसके लिए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों अनिल पालटा, प्रशांत सिंह और एमएस भाटिया के नामों का पैनल तैयार किया गया है, जिसमें से किसी एक को राज्य की पुलिस की कमान सौंपी जाएगी. गौरतलब है कि मौजूदा प्रभारी डीजीपी तदाशा मिश्रा 31 दिसंबर को रिटायर हो रही हैं. ऐसे में सरकार उसी दिन या उससे पहले नए डीजीपी की नियुक्ति का ऐलान कर सकती है.
चार रेंज में खाली पड़े हैं DIG के पद
इस वक्त झारखंड में रांची, हजारीबाग, बोकारो और पलामू रेंज में डीआईजी के पद खाली हैं. इसी बीच 2012 बैच के आईपीएस अधिकारियों को डीआईजी रैंक में प्रमोशन दिया जाना है. माना जा रहा है कि प्रोन्नति के साथ-साथ उनकी नई पोस्टिंग भी तय कर दी जाएगी. उम्मीद है कि 31 दिसंबर को ही इससे जुड़ी अधिसूचना जारी हो सकती है. इसके अलावा, इसी दौरान 2008 बैच के आईपीएस अधिकारियों को आईजी रैंक में प्रमोशन देने की अधिसूचना भी जारी होने की संभावना है.
पहले UPSC करती थी DGP की नियुक्ति
पहले झारखंड में डीजीपी की नियुक्ति संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के जरिए होती थी. राज्य सरकार वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम भेजती थी और यूपीएससी उसी पैनल में से डीजीपी का चयन करता था. लेकिन हेमंत सोरेन सरकार ने बाद में डीजीपी नियुक्ति के लिए अपनी अलग नियमावली बनाई. अब इसी नियमावली के तहत राज्य में पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति होती है. इस नियम के तहत डीजीपी बनने वाले पहले अधिकारी अनुराग गुप्ता थे. इसके बाद तदाशा मिश्रा को प्रभारी डीजीपी की जिम्मेदारी दी गई. अब एक बार फिर इसी प्रक्रिया के तहत अनिल पालटा, प्रशांत सिंह और एमएस भाटिया में से किसी एक को डीजीपी बनाया जाएगा.
अनुराग गुप्ता की नियुक्ति पर हुआ था बड़ा विवाद
डीजीपी अनुराग गुप्ता की नियुक्ति को लेकर पहले ही जमकर विवाद हो चुका है. बीजेपी ने आरोप लगाया था कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व वाली महागठबंधन सरकार संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन कर रही है और संघीय ढांचे का अपमान कर रही है. पार्टी का कहना था कि यूपीएससी से डीजीपी नियुक्ति का अधिकार छीनना गलत है. हालांकि, हेमंत सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार है. बाद में कार्यकाल पूरा होने से पहले ही अनुराग गुप्ता ने इस्तीफा दे दिया था. गौरतलब है कि अनुराग गुप्ता को सेवानिवृत्ति के बाद सेवा विस्तार देते हुए डीजीपी नियुक्त किया गया था, जो उस समय चर्चा का बड़ा कारण बना था. अब देखना होगा कि इस बार सरकार किस नाम पर अंतिम मुहर लगाती है.
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