देवघर (DEPOGHAR) : संथाल परगना चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, देवघर का एक प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह से देवघर एयरपोर्ट के वीआईपी लाउंज में मिला. प्रतिनिधिमंडल में चैंबर के अध्यक्ष आलोक मल्लिक, महासचिव रितेश टिबड़ेवाल, कोषाध्यक्ष प्रिंस सिंघल, कार्यकारिणी सदस्य संजय मालवीय और महेश लाठ शामिल थे. चैंबर ने देवघर के लिए दिल्ली हाट की तर्ज पर बैद्यनाथ हाट और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी की स्थापना की मांग की.
इस संबंध में ज्ञापन देते हुए चैंबर ने कहा है कि झारखंड राज्य की सांस्कृतिक राजधानी देवघर तेजी से विकास करने वाला प्रमुख शहर है, जहां धार्मिक, आध्यात्मिक, पर्यटन, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाएं, उद्योग एवं व्यापार आदि के क्षेत्र में विकास की प्रबल संभावनाएं हैं. विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला समेत तीर्थाटन, आध्यात्म और पर्यटन के लिए बड़ी संख्या में लोग यहां साल भर लगातार आते रहते हैं. द्वादश ज्योतिर्लिंग बाबा बैद्यनाथ मंदिर के कारण प्रमुख मेलों और त्योहारों के अलावा सामान्य दिनों में यहां प्रतिदिन 10 से 20 हजार लोगों की आवाजाही होती है.
देवघर की आर्थिक दशा और दिशा का सबसे बड़ा केंद्र स्वयं बाबा भोलेनाथ और बाबा मंदिर हैं. इसके अलावा ठाकुर अनुकूल चंद्र के सत्संग आश्रम, योग गुरु स्वामी सत्यानंद जी के रिखियापीठ, श्रीमोहनानंद आश्रम, पागल बाबा आश्रम समेत कई आध्यात्मिक केंद्रों पर देश-विदेश से लोग आते हैं. लेकिन यहां तीर्थाटन, धर्म और पर्यटन के लिए आने वाले यात्रियों के लिए अतिरिक्त समय बिताने, घूमने-फिरने और स्थानीय हस्तशिल्प/कारीगरों, कला-संस्कृति को देखने, प्रदर्शनी लगाने और खरीदारी करने के लिए गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं. जबकि देश के कई धार्मिक और पर्यटन केंद्रों में ऐसे कई स्थानीय बाजार और सांस्कृतिक केंद्र मौजूद हैं.
संप चैंबर ने वस्त्र मंत्रालय के तहत लोकप्रिय योजना राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम के तहत बैद्यनाथ हाट के नाम से शहरी बाजार के निर्माण की मांग की है, जिसमें बिक्री के लिए स्टॉल, कारीगरों के लिए छात्रावास, कॉन्फ्रेंस हॉल और गेस्ट हाउस, फूड कोर्ट, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए मंडप और मंच, बैठक और सम्मेलन कक्ष, स्मारिका दुकानें, स्टोर रूम और अत्याधुनिक शौचालय की सुविधा एक ही स्थान पर बनाई जाए.
चैंबर का मानना है कि इससे यहां आने वाले पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी कई लाभ होंगे. इससे जहां स्थानीय कारीगरों को प्रशिक्षण, उत्पादों की बिक्री और प्रदर्शनी का लाभ मिलेगा, वहीं स्थानीय कला और संस्कृति प्रेमियों को भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों को समृद्ध, प्रदर्शित और आयोजित करने का मंच मिलेगा. चैंबर ने एक अन्य ज्ञापन में वस्त्र मंत्रालय से देवघर में निफ्ट (राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान) की स्थापना की मांग की है. चैं
चैंबर ने कई बातों का उल्लेख करते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और केरल में निफ्ट की स्थापना उन राज्यों की राजधानियों के बजाय रायबरेली, जोधपुर, कांगड़ा, कन्नूर में की गई है. इसलिए झारखंड राज्य में भी प्रस्तावित निफ्ट केंद्र को देवघर में स्थापित करने पर विचार किया जाना चाहिए, ताकि राज्य की राजधानियों के साथ-साथ विभिन्न शहरों में प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना कर संतुलित क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित किया जा सके. चैंबर ने मंत्री से देवघर में निफ्ट परिसर आवंटित करने की मांग करते हुए कहा है कि देवघर तेजी से विकसित हो रहा शहर है, जहां फैशन और वस्त्र उद्योग में शिक्षा, उद्यमिता और रोजगार को बढ़ावा देने की अपार संभावनाएं हैं. देवघर एयरपोर्ट, रेल और सड़क मार्ग से काफी मजबूत संपर्क में है. दुमका, देवीपुर, जसीडीह और गोड्डा के साथ-साथ बिहार के भागलपुर, बांका, जमुई आदि से निकटता के कारण देवघर समृद्ध कपड़ा और शिल्प समूहों का घर है.
निफ्ट के छात्रों को उद्योग भ्रमण, इंटर्नशिप और व्यावहारिक परियोजनाओं की आवश्यकता होती है, जो देवघर को एक आदर्श शिक्षण वातावरण बनाता है. यहां बन रहे निफ्ट का आर्थिक और सांस्कृतिक प्रभाव भी महत्वपूर्ण है. यह पारंपरिक शिल्प को पुनर्जीवित करेगा, क्षेत्रीय कारीगरों को बढ़ावा देगा और आधुनिक तकनीक के साथ कपड़ा उत्पादन को उन्नत करेगा. यह निवेशकों को आकर्षित करेगा, स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा और फैशन, कपड़ा और संबद्ध उद्योगों में रोजगार के अवसर पैदा करेगा.
उपरोक्त दोनों मांगों पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने चैंबर को सकारात्मक आश्वासन दिया है और कहा है कि भारत सरकार आपकी मांगों पर निश्चित रूप से पहल करेगी.
रिपोर्ट-ऋतुराज
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