Big breaking-प्रेम प्रकाश मामले में बिरसा मुंडा केन्द्रीय कारा का बड़ा बाबू ईडी कार्यालय में तलब, मनीलांड्रिंग के गवाहों को फोन से धमकी देने का आरोप

    Big breaking-प्रेम प्रकाश मामले में बिरसा मुंडा केन्द्रीय कारा का बड़ा बाबू ईडी कार्यालय में तलब, मनीलांड्रिंग के गवाहों को फोन से धमकी देने का आरोप

    Ranchi-एक तरफ जहां ईडी केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र भेजकर प्रेम प्रकाश और अमित अग्रवाल को झारखंड से बाहर भेज कर राज बदर करने की तैयारी में है, वहीं दूसरी तरह उसने आज बिरसा मुंडा केन्द्रीय कारा के बड़ा बाबू दानिश रिजवान को पूछताछ के लिए अपने क्षेत्रीय कार्यालय में तलब किया है, जबकि कल जेलर मो. नसीम से पूछताछ करने की तैयारी की जा रही है.

    यहां बता दें कि तीन नम्बर को जब जेल में ईडी की छापेमारी हुई थी, तब दानिश रिजवान का मोबाइल को भी जब्त किया गया था, ईडी का दावा है कि दानिश रिजवान के मोबाइल से मनी लांड्रिंग के गवाहों को धमकी दिया जा रहा था. सूत्रों का दावा है कि ईडी जेल के तमाम अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का मूड बना चुकी है.

    नक्सलियों के सहयोग से ईडी अधिकारियों को रास्ते से हटाने की साजिश में 

    ध्यान रहे कि ईडी का दावा है कि जेल में खनन घोटला और जमीन घोटला के आरोपों में जेल में प्रेम प्रकाश के द्वारा ईडी अधिकारियों को झूठे मामले में फंसाने के लिए महिलाओं का उपयोग किये जाने की साजिश रची जा रही है, इसके साथ ही प्रेम प्रकाश इन जांच अधिकारियों को रास्ते से हटाने के लिए नक्सलियों और आपराधिक गिरोहों के संर्पक में था. ईडी ने इस बाबत पूरी जानकारी पीएमएलए कोर्ट को भी उपलब्ध करवा दिया है. ताकि पीएमएलए कोर्ट से इन्हे बाहर भेजने की अनुमति प्राप्त किया जा सके.

    रघुवर शासन काल में चलता था प्रेम प्रकाश का जलबा

    यहां बता दें कि प्रेम प्रकाश की गिनती कभी सत्ता के गलियारे में दलाल के रुप में की जाती थी, पूर्व सीएम रघुवर दास की सरकार में तो इसका कुछ अलग ही रुतबा था, दावा किया जाता था कि तब अधिकारियों के सारे तबादले इसी प्रेम प्रकाश के माध्यम से होता था, और इसके बदले में पैसे की उगाही होती थी, जब सरकार बदली और रघुवर दास रुखस्त हो गयें, उसके बाद प्रेम प्रकाश हेमंत सरकार का करीबी हो गया. इस बीच उसका नाम खनन घोटला से लेकर जमीन घोटाले में उछलता रहा. इन्ही आरोपों की जांच के क्रम में हरमू स्थित उसके आवास से दो AK-47 भी बरामद किया गया था. आखिरकार उसे अवैध खनन के मामले में 25 अगस्त 2022 को गिरफ्तार कर बिरसा मुंडा केन्द्रीय कारा भेज दिया गया और इस वर्ष 11 अगस्त उस पर जमीन घोटाले का आरोप भी लगा और इस मामले में उसकी गिरफ्तारी हो गयी.

    जेल में भी कायम है प्रेम प्रकाश का जलबा

    लेकिन अब ईडी का दावा है कि प्रेम प्रकाश जेल में रहकर भी अपना साम्राज्य कायम किये हुए हैं, जेल में जाने के बाद भी उसके रसूख और तेवर में कोई बदलाव नहीं हुआ है. आज भी जेल में उसकी दरबार सजती है, और वह उसी जेल में अधिकारियों को आदेश जारी करता है, और अधिकारी भी छुपते छूपाते उससे मिलने के लिए जेल आते हैं.

    अधिकारियों पर बलात्कार और यौन शोषण का आरोप लगाने की थी तैयारी

    लेकिन सबसे अधिक चौंकने वाला दावा यह है कि प्रेम प्रकाश जेल में बंद रहकर भी ईडी अधिकारियों को सलटाने की तैयारी में था, वह एक साथ कई फ्रंट पर काम कर रहा था. एक तरफ वह नक्सलियों और आपारधिक गिरोहों से साथ गांठ कर ईडी अधिकारियों को रास्ते से हटाने का प्लानिंग तैयार कर रहा था, तो दूसरी ओर वह कुछ ऐसी महिलाओं की खोज में था, जो सीधे सीधे इन जांच अधिकारियों पर बलात्कार और यौन शोषण का गंभीर आरोप लगा सके. दावा किया जाता  है कि उसकी प्लानिंग जांच अधिकारियों के  विरुद्ध गंभीर धाराओं में  मामला दर्ज करवाना था, ताकि इन जांच अधिकारियों को तत्काल गिरफ्तार कर उसी जेल में लाया जा सके, जहां आज खुद प्रेम प्रकाश पड़ा है.

    बताया जा रहा है कि समय रहते ईडी अधिकारियों को अपने खिलाफ तैयार हो रहे इस खतरनाक साजिश की बू लग गयी और जैसे ही ईडी को इस खतरनाक प्लानिंग की जानकारी मिली, उनके सांप सूंघ गयें, क्योंकि ईडी ने तो इस बात की कल्पना भी नहीं की थी कि प्रेम प्रकाश इस हद तक खतरनाक प्लानिंग करता है.

    झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने बताया सियासी षडयंत्र का हिस्सा

    हालांकि अभी तक यह सिर्फ आरोप हैं, जो ईडी की ओर से लगाया गया है, सरकार का दावा इसके ठीक उलट है, झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने  ईडी के इन तमाम आरोपों को एक खतरनाक सियासी षडयंत्र का हिस्सा बताया है, उनका दावा है कि यदि ईडी के पास कोई ऐसा साक्ष्य हैं, तो उसे वह सार्वजनिक करें, जेल में छापेमारी के  दौरान अधिकारियों के हाथ कौन सा जादुई हथियार निकल आया, जिसके आधार इस तरह के दावे किये जा रहे हैं, उसकी जानकारी तो होनी चाहिए. लेकिन दिक्कत है कि यह तमाम दावे ईडी की ओर से नहीं होकर भाजपा के द्वारा किया जा रहा है, जिस प्रकार के बयान भाजपा के द्वारा दिये जा रहे हैं, उससे तो लगता है कि भाजपा ही ईडी की प्रवक्ता बन गयी है, और ईडी अपनी एक एक जानकारियां सबसे पहले भाजपा कार्यालय तक पहुंचा रही है.

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