रंग बदलकर देगा हवा में मौजूद प्रदूषण की जानकारी, छठी कक्षा की छात्राओं का अनोखा प्रयोग

    रंग बदलकर देगा हवा में मौजूद प्रदूषण की जानकारी, छठी कक्षा की छात्राओं का अनोखा प्रयोग

    धनबाद : हम जिस हवा में सांस लेते हैं वह कितनी स्वच्छ है  इसकी जानकारी आम लोगों को नहीं होती. जबकि प्रदूषित हवा शरीर में प्रवेश कर कई गंभीर बीमारियों को जन्म देती है. ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि जिस वातावरण में हम रह रहे हैं वहां की आबोहवा कितनी सुरक्षित है. अब इसके लिए न तो महंगी मशीनें लगाने की जरूरत है और न ही किसी तकनीकी विशेषज्ञता की. कोयलांचल की दो बाल वैज्ञानिकों ने ऐसा पेंट तैयार किया है जो हवा में मौजूद प्रदूषण की जानकारी रंग बदलकर देगा.

    छठी कक्षा की छात्राओं का अनोखा प्रयोग

    डिगवाडीह स्थित डीनोबिली स्कूल की छठी कक्षा की छात्राएं स्वरा एस राव और आव्या साहू ने इस अनोखे प्रयोग को सफलतापूर्वक तैयार किया है. उन्होंने इसे “बायोसिग्नल पेंट” नाम दिया है. यह पेंट दीवार पर लगाए जाने के बाद आसपास की हवा में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य हानिकारक गैसों के बढ़ने या घटने का संकेत देता है सामान्य स्थिति में यह पेंट बैंगनी रंग का रहता है लेकिन जैसे ही हवा में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ती है पेंट का रंग बदलकर हरा हो जाता है. वहीं प्रदूषण कम होने पर यह फिर से अपने मूल बैंगनी रंग में लौट आता है। इस तरह बिना किसी उपकरण के लोग अपने आसपास के वायु प्रदूषण की स्थिति जान सकते हैं.

    गैसों के प्रभाव से बदलता है रंग

    छात्रा स्वरा एस राव ने बताया कि यह पेंट रेड कैबेज के जूस और जिलेटिन पाउडर से बनाया गया है. रेड कैबेज में पाया जाने वाला एंथोसायनिन नामक रसायन पीएच सेंसिटिव होता है जो गैसों के प्रभाव से रंग बदलता है. स्वरा के अनुसार, माइनिंग क्षेत्र में कोयले की कटाई के दौरान अत्यधिक धूल और प्रदूषण से सांस लेने में परेशानी हो रही थी, तभी उन्हें इस प्रयोग का विचार आया.

    यह उपलब्धी गर्व का विषय

    वहीं छात्रा आव्या साहू ने बताया कि बायोसिग्नल पेंट पूरी तरह इको-फ्रेंडली है और इसे बनाना भी आसान है. रेड कैबेज को उबालकर उसका जूस निकाला जाता है उसमें जिलेटिन मिलाकर पेंट तैयार किया जाता है. डीनोबिली स्कूल के प्राचार्य फादर सुशील सुमन ने इस उपलब्धि को स्कूल और समाज के लिए गर्व की बात बताया। उन्होंने कहा कि यह पेंट लोगों को प्रदूषण के प्रति जागरूक करेगा और बचाव के उपाय अपनाने में मदद करेगा. स्वरा के पिता डॉ. संतोष राव और आव्या की माता आरती साहू दोनों सिंफर में वैज्ञानिक हैं.

    रिपोर्ट : नीरज कुमार


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