दादासाहेब फालके: भारतीय फिल्म के पितामह ने संघर्ष के सारे आयाम देखे,तभी आज मिला इतना सम्मान, पुण्यतिथि पर विशेष

    दादासाहेब फालके: भारतीय फिल्म के पितामह ने संघर्ष के सारे आयाम देखे,तभी आज मिला इतना सम्मान, पुण्यतिथि पर विशेष

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK): भारतीय फिल्म जगत के पितामह कहे जाने वाले दादासाहेब फालके फिल्मों के लिए ही बने. एक मुकम्मल फिल्म निर्माता निर्देशक अभिनेता के अलावा तकनीकी रूप से दक्ष दादासाहेब फालके का फिल्म जगत में अवदान अतुलनीय रहा है. फिल्मों की बारीकियों को उन्होंने ऐसे समझा कि आज तक कोई उनका जोड़ नहीं हो सका.

    भारतीय फिल्म जगत के प्रथम निर्माता बने दादासाहेब

    दादासाहेब फालके सर जे जे स्कूल ऑफ आर्ट के प्रशिक्षित कलाकार थे. उन्होंने फोटोग्राफी केमिकल प्रिंटिंग का भी काम किया. आर्थिक सहयोग बंद होने की वजह से वे थोड़ा परेशान हो गए. उन्होंने एक फिल्म ईसा मसीह देखी तो उन्होंने ठान लिया कि वे फिल्म बनाने का काम करेंगे. अपने जुनून और कला धर्मिता की वजह से वह भारतीय फिल्म जगत के प्रथम निर्माता बन गए.

    16 फरवरी को उनकी पुण्यतिथि

    फिल्म प्रोडक्शन के क्षेत्र में एक कोर्स करने के लिए वे इंग्लैंड भी गए. वहां एक एक व्यक्ति के साथ उन्होंने काम भी किया. फिल्म बनाने का हुनर आने के बाद दादा साहब फाल्के ने 'राजा हरिश्चंद्र' नामक फिल्म बनाई. फिल्म समीक्षक या प्रेस मीडिया ने भी उनकी फिल्म को ज्यादा तवज्जो नहीं दिया. बावजूद इसके वे संघर्ष करते रहे. राजा हरिश्चंद्र फिल्म मराठी में जब रिलीज हुई तो उसे दर्शकों ने खूब सराहा.दादा साहब फाल्के का भारतीय फिल्म जगत में बड़ा योगदान रहा है. इस कारण उनके नाम पर सबसे बड़ा सम्मान फिल्म जगत से जुड़े लोगों को दिया जाता है. 16 फरवरी को उनकी पुण्यतिथि है. उनके प्रशंसक और फिल्म जगत से जुड़े लोग उनका बड़ा सम्मान करते हैं. दादा साहेब फाल्के का जन्म 1870 में हुआ था और उनकी मृत्यु 1944 में नासिक में हुई थी.


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