लोगों को रोमांटिक बनाने में महत्वपूर्ण योगदान रहा रफी साहब का, जानिए जयंती पर उनसे जुड़ी खास बातें 

    लोगों को रोमांटिक बनाने में महत्वपूर्ण योगदान रहा रफी साहब का, जानिए जयंती पर उनसे जुड़ी खास बातें 

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK): वैसे तो कहा जाता है कि हर व्यक्ति के मन मस्तिष्क में रोमांस तो होता ही है. युवावस्था में यह भाव किसी में काम तो किसी में अधिक हो सकता है. रोमांस तरन्नुम के माध्यम से प्रदर्शित भी होता है. इसमें एक बड़ा योगदान गीत संगीत का है. अभी खासकर फिल्मी गानों का गजलों का. चलिए हम बात करते हैं रोमांटिक गानों के बादशाह कहे जाने वाले मोहम्मद रफी साहब की. 24 दिसंबर उनका जयंती दिवस है. मोहम्मद रफ़ी साहब का जन्म 1924 में आज ही के दिन हुआ था. उनके गीत, गजल,भक्ति गीत, भजन,कव्वाली सभी फेमस हुए. उन्हें शहंशाह ए तरन्नुम कहा जाता था. उनके गानों में इतनी मधुरता थी कि लोग गाते-गाते खुद को रोमांटिक हो जाते हैं.

    संगीत में 40 साल का सफर 

    मोहम्मद रफी साहब के गीत आज भी नई पीढ़ी के लोगों को पसंद आते हैं. उनका संगीत में सफर लगभग 40 साल का रहा. उनके कई गाने आप भी खुद बनाते होंगे.' राही मनवा दुख की चिंता क्यों सताती है दुख तो अपना साथी है','गुलाबी आंखें जो तेरी देखी,शराबी यह दिल हो गया','तुम कमशिन हो, नादां हो, नाजुक हो, भोली हो','चाहूंगा मैं तुम्हें सांझ सवेरे,फिर भी कभी अब नाम को तेरे,आवाज में न दूंगा','उड़े जब जब जुल्फें तेरी' जैसे अनगिनत मेलोडियस गाने उन्होंने गाए. 'बहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है, मेरा महबूब आया है', यह गीत तो मनोहर शादी विवाह का एक अनिवार्य अंग हो गया है. जब बारात दरवाजे पर आती है तो हर बैंड बाजी की टीम इसी की धुन बजाते हैं.

    अपनी आवाज से आज भी लोगों के दिलों पर कर रहे राज 

    मोहम्मद रफी साहब ने कई भाषाओं में भी गाने गाए हैं. मोटे तौर पर चार दशक तक उन्होंने गाने गाए और 26000 से अधिक उनके गीत हैं. उन्होंने गुरुदत्त, दिलीप कुमार,भारत भूषण, जॉनी वॉकर, जॉय मुखर्जी,शम्मी कपूर, राजेंद्र कुमार,राजेश खन्ना धर्मेंद्र जीतेंद्र, ऋषि कपूर,मिथुन चक्रवर्ती जैसे फिल्मी कलाकारों के लिए गाने गाए. उन्होंने अपने साथी गायक कलाकार किशोर कुमार महेंद्र कपूर मुकेश के साथ भी कई गाने गाए. मोहम्मद रफ़ी साहब का अंत काल 31 जुलाई 1980 को हो गया. लेकिन वह अपनी आवाज के माध्यम से आज भी हमारी भी हंसते और मुस्कुराते रहते हैं. जी हां मैंने जो कहा कि साठ के दशक के बाद से अगर युवा वर्ग में रोमांटिक मिजाज को किसी ने पुस्तक किया तो उनमें एक बड़ा योगदान रफी साहब के गीतों का भी है. आप मेरी बातों से जरूर सहमत होंगे.


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