Oscars 2024:झारखंड की बाप-बेटी की कहानी पर बनी फिल्म ने Oscars में बनाई जगह, ‘To kill a tiger’ बेस्ट डॉक्यूमेंट्री फिल्म में नॉमिनेट  

    Oscars 2024:झारखंड की बाप-बेटी की कहानी पर बनी फिल्म ने Oscars में बनाई जगह, ‘To kill a tiger’ बेस्ट डॉक्यूमेंट्री फिल्म में नॉमिनेट   

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK):भारतीय फिल्मों को ऑस्कर अवार्ड में नॉमिनेशन मिलना बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जाती है,आजकल बॉलीवुड में जिस तरह की फिल्में बन रही है उसमें किसी एक फिल्म को भी यदि ऑस्कर अवार्ड मिल जाए तो लोगों के लिए बड़ी बात होती है, वही भारत में बननेवाली छोटी-छोटी डाक्यूमेंट्री फिल्म ऑस्कर में नॉमिनेशन की जगह बना रही हैं हम बात कर रहे हैं तो ‘टू किल अ टाइगर’ डॉक्यूमेंट्री की. ऑस्कर नॉमिनेशन 2024 की घोषणा हो चुकी है, वहीं यह फिल्म इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसको ऑस्कर 2024 में नॉमिनेशन मिला है.

    डायरेक्टर निशा पाहुजा ने बहुत ही खूबसूरती के साथ कहानी को पर्दे पर उतारा है

    ‘To kill a tiger’ फिल्म बहुत ही छोटी है, लेकिन डायरेक्टर निशा पाहुजा ने बहुत ही खूबसूरती के साथ कहानी को पर्दे पर उतारा है, जो सीधे लोगों के दिलों में उतरती है.इस फिल्म की सच्ची घटना पर आधारित है.फिल्म की कहानी झारखंड के एक छोटे से गांव की है.जिसमे एक 13 साल की बच्ची के गरीब पिता अपनी बेटी को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ता है, क्योंकि उसकी बेटी के साथ गैंगरेप हुआ होता है.13 साल की बच्ची को पहले तो अपहरण किया जाता है, फिर कुछ दरिंदें मिलकर उसके साथ गैंगरैप करते है. जिसके बाद गरीब किसान पिता अपनी बच्ची को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष करता है.

    डॉक्यूमेंट्री झारखंड के छोटे से जिले की सच्ची घटना पर है आधारित है

    आपको बताये कि 9 अप्रैल 2017 को झारखंड के बेरो जिला में एक मासूम बच्ची के साथ गैंगरैप की घटना हुई थी, जिसमे एक 13 साल की बच्ची शादी सामारोह में अपने गांव के किसी घर में गई हुई थी, इसी दौरान सभी नाच गाना में वयस्त रहते है, और बच्ची को अकेला पाकर बच्ची के रिश्ते में चाचा लगनेवाले तीन युवक उसको सुनसान जगह पर ले जाते है, और उसके साथ रेप की घटना को अंजाम देते है, इसके बाद बच्ची डरी सहमी और दर्द से कराहती हुई अपने घर पहुंचती है.जब उसके पिता ये सब देखते है, तो थाना में इसकी शिकायत दर्ज कराते है,सभी आरोपियों को पुलिस गिरफ्तार भी करती है, लेकिन पीड़िता को ये राहत ज्यादा दिन तक नहीं मिलती है.

    अब बच्ची की उम्र 18 साल से अधिक है ,लेकिन डॉक्यूमेंट्री में उसकी पहचान उजागर की गई है

    आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद गांव वाले और उनके नेता पीड़ित परिवार पर आरोप वापस लेने का दबाव बनाते हैं, लेकिन पिता हार नहीं मानता है, और बेटी की न्याय की लड़ाई लड़ता रहता है, इस बीच दरिंदों के साथ गांव की घटिया सोच के खिलाफ भी लड़ना पड़ता है, वहीं गरीबी भी उसके सामने चुनौती बनकर खड़ी रहती है.अब बच्ची की उम्र 18 साल से अधिक है ,लेकिन डॉक्यूमेंट्री में उसकी पहचान उजागर की गई है.


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