TATA STEEL: दस्तूर परिवार में जन्मे जमशेदजी को कैसे मिला टाटा सरनेम पढ़े इसके पीछे की रोचक कहानी

    TATA STEEL: दस्तूर परिवार में जन्मे जमशेदजी को कैसे मिला टाटा सरनेम पढ़े इसके पीछे की रोचक कहानी

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK): टाटा ग्रुप देश ही नहीं विदेशो में भी पूरी सफलता के साथ कारोबार कर रहा है. यह भारत के सबसे बड़े व्यापारिक घरानों में से एक है, जिसकी सालाना कमाई 33 लाख करोड़ से भी अधिक है. कंपनी की स्थापना जमशेदजी टाटा ने 1907 में की थी. जो आज 150 देशों में व्यापार करता है. टाटा पर पूरे देश का विश्वास है. टाटा का ब्रांड भरोसे और विश्व विश्वास का दूसरा नाम है.टाटा का नाम सुनते ही लोगों में एक विश्वास जागृत होता है जो इस कंपनी के लिए गर्व की बात है.

    जमशेदजी को कैसे मिला टाटा सरनेम
    वैसे तो टाटा स्टील के पहले संस्थापक जमशेदजी टाटा नवसारी के मूल निवासी थे और मूल रूप से दस्तूर परिवार यानी पुजारी परिवार में जन्में थे, लेकिन दस्तूर की जगह वह अपना सरनेम टाटा लगाते थे. इसके पीछे की काफी कहानी काफी दिलचस्प है. आज हम आपको बतानेवाले हैं कि क्यों जमशेदजी टाटा दस्तूर की जगह टाटा सरनेम लगाते थे और इसको ये सरनेम कैसे मिला.

    जमशेदजी मूल रूप पुजारी परिवार में जन्में थे

    मनी कंट्रोल रिपोर्ट की मानें तो नवसारी में रहनेवाले पारसी समुदाय के लोग पारस से आए. पारसियों का पहला जत्था गुजरात की संजान में आया था. बताया जाता है कि साल 1122 में पहली बार पारसी नवसारी आए थे. उसी साल पारसी पुजारियों का एक दल भी नवसारी आया था. जिसमे जमशेदजी के पूर्वज भी शामिल थे. भले जमशेदजी को आज लोग टाटा के नाम से जानते हैं लेकिन आपको हम बताये कि जमशेदजी मूल रूप पुजारी परिवार में जन्में थे और इनका सरनेम दस्तूर था,तो फिर जमशेदजी क्यों टाटा सरनेम लगाते थे.
    पढ़े टाटा सरनेम पड़ने का रोचक किस्सा

    जानकार बताते हैं कि जमशेदजी के पूर्वज गर्म मिजाज के थे. गुजराती में गर्म दिमाग वाले को टाटा कहा जाता है. जैसे किसी को गर्म मिजाज व्यक्ति को कहा जाएगा कि उसका स्वभाव बहुत टाटा है. जमशेदजी के परिवार को स्वाभाव की वजह से सब टाटा कहते थे, जिसके बाद उनका सरनेम ही टाटा हो गया.

    कंपनी का स्लोगन है कि स्टील से मजबूत हमारा विश्वास हो
    टाटा कंपनी की स्थापना लगभग 117 साल पहले हुई थी जो आज भी अपने विश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है टाटा कंपनी का एक ही उद्देश्य है कि विश्वास के साथ कोई समझौता ना किया जाए. कंपनी का स्लोगन है कि स्टील से मजबूत हमारा विश्वास हो. आज चाय की चुस्की से लेकर सब्जी में पड़ने वाले नमक तक और बड़ी-बड़ी गाड़ियों के निर्माण में टाटा स्टील पूरे दमखम के साथ करता है.कंपनी छोटी छोटी बातों को भी नज़रअंदाज़ नहीं करती है और जो उसकी ख़ासियत है.


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