बिहार में मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को मिली रफ्तार, मुख्य सचिव ने मेगा परियोजनाओं की तय की डेडलाइन


पटना (PATNA): बिहार में उत्तर से दक्षिण तक बुनियादी ढांचा विकास को नई गति देने के लिए मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने तीन प्रमुख परियोजनाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए स्पष्ट डेडलाइन तय की है. नार्थ कोयल जलाशय, मंडई वीयर और ताजपुर-बख्तियारपुर ग्रीनफील्ड पथ को उन्होंने राज्य की कृषि और कनेक्टिविटी की रीढ़ बताया और कार्य में किसी भी तरह की ढिलाई पर सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए.
नार्थ कोयल जलाशय परियोजना पर खास जोर
गया और औरंगाबाद जिलों के लिए जीवनरेखा मानी जा रही नार्थ कोयल जलाशय परियोजना की प्रगति पर मुख्य सचिव ने गहन समीक्षा की. गया के जिलाधिकारी ने जानकारी दी कि 28 जनवरी तक परियोजना में उल्लेखनीय प्रगति सुनिश्चित की जाएगी. मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि नहरों और डिस्ट्रिब्यूटरी नेटवर्क को इस तरह विकसित किया जाए, जिससे खरीफ और रबी दोनों फसलों की सिंचाई सुनिश्चित हो सके. जहां काम की गति धीमी है, वहां अतिरिक्त कार्यबल तैनात करने और साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट देने का आदेश दिया गया है.
मंडई वीयर परियोजना की सुस्ती पर नाराजगी
मंडई वीयर परियोजना की धीमी रफ्तार पर मुख्य सचिव ने नाराजगी जताते हुए औचक निरीक्षण की चेतावनी दी. फल्गु नदी की सहायक धाराओं पर आधारित यह परियोजना जल संचयन और भू-जल स्तर सुधार के लिहाज से बेहद अहम है. इसके पूरा होने से जहानाबाद समेत आसपास के इलाकों में पारंपरिक आहर-पईन व्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
ताजपुर-बख्तियारपुर ग्रीनफील्ड पथ से बदलेगी कनेक्टिविटी
ताजपुर-बख्तियारपुर ग्रीनफील्ड पथ की मौजूदा प्रगति पर संतोष जताते हुए मुख्य सचिव ने इसके रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया. 51.2 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर समस्तीपुर के ताजपुर को पटना के बख्तियारपुर से सीधे जोड़ेगा, जिससे उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच की दूरी करीब दो घंटे कम हो जाएगी. बैठक में सड़क के दोनों ओर औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने और सघन पौधारोपण सुनिश्चित करने पर भी चर्चा हुई. यह मार्ग वैशाली और समस्तीपुर के कृषि उत्पादों को पटना के बाजारों तक तेजी से पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा.
भूमि अधिग्रहण और एनओसी पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश
मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों और विभागीय सचिवों को निर्देश दिया कि भूमि अधिग्रहण, वन विभाग की एनओसी या अन्य प्रशासनिक अड़चनों का समाधान अंतर-विभागीय समन्वय से तुरंत किया जाए. साथ ही रैयतों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया गया.
बैठक के अंत में मुख्य सचिव ने साफ शब्दों में कहा कि ये परियोजनाएं केवल निर्माण कार्य नहीं, बल्कि बिहार के आर्थिक और सामाजिक विकास की आधारशिला हैं, जिनमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
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