हाजीपुर CO ने जब्त डीजे को छोड़ने की बात स्वीकारी, शांति समिति की बैठक में दिया बयान


हाजीपुर : वैशाली जिला के भगवानपुर प्रखंड की अंचलाधिकारी (CO) कनकलता ने एक जब्त डीजे को छोड़ने की बात स्वीकार की है. उन्होंने यह बयान 23 जनवरी को होने वाली सरस्वती पूजा की शांति समिति की बैठक में दिया. उनके इस बयान से उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
सीओ कनकलाता ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा है कि एक साल पहले उन्होंने पदभार संभालने के बाद एक डीजे जब्त किया था. उनके अनुसार डीजे मालिक ने उनके पैर पकड़े जिसके बाद उन्होंने उसे छोड़ दिया. सीओ ने अपने बयान में कहा "जब हमने ज्वाइन किया था डीजे को हमने जब्त किया तो उसने मेरा पैर पकड़ा और उसे मैं छोड़ दिया।"
शांति समिति की बैठक में सामने आई बात
अंचलाधिकारी का यह बयान जब्त संपत्ति को छोड़ने की निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के संभावित उल्लंघन की ओर इशारा करता है. सरकारी नियमों के तहत जब्त की गई संपत्ति को छोड़ने के लिए एक विशिष्ट कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होता है. यह जानकारी भगवानपुर थाना परिसर में आयोजित शांति समिति की बैठक के दौरान सामने आई. यह बैठक 23 जनवरी को होने वाली सरस्वती पूजा को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के उद्देश्य से बुलाई गई थी.
अगर डीजे बजा तो लाइसेंस होगा जब्त
इसमें जनप्रतिनिधि, डीजे संचालक और पूजा समिति के सदस्य मौजूद थे. जिसका विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. सीईओ कनकलता ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा की खुशी का मौका है लोग खुशी से मनाएं अच्छी बात है लेकिन उड़नता नहीं होनी चाहिए. पिछली बार मैं नया जॉइन की थी तब हमने एक डीजे को पकड़ा जब उसने मेरा पैर पकड़ लिया तो उसे मैंने छोड़ दिया. अगर डीजे बजा तो डीजे का लाइसेंस तुरंत जब्त होगा. हम अपने हाथों से FIR करेंगे. इस घटना के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या किसी अधिकारी के पैर पकड़ने मात्र से जब्त संपत्ति को छोड़ा जा सकता है ? यह घटना सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही और कानूनी प्रक्रियाओं के पालन पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है. वरीय अधिकारियों की ओर से इस मामले में क्या कार्रवाई की जाती है यह देखना बाकी है.
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