गया: कस्तूरबा बालिका विद्यालय के मिड डे मील भोजन में मिली छिपकली, कई छात्राएं बीमार 

    गया: कस्तूरबा बालिका विद्यालय के मिड डे मील भोजन में मिली छिपकली, कई छात्राएं बीमार 

    गया(GAYA): केंद्र सरकार की ओर से देश के सभी सरकारी स्कूल के बच्चों के लिए एक योजना चलाई गई थी. इसका नाम मिड डे मील रखा गया. इस योजना के तहत दोपहर के टाइम स्कूल में ही सभी बच्चों को पौष्टिक और पेट भर खाना दिया जाता है. लेकिन योजना में लगातार लापरवाही देखने को मिलती है. आए दिन मिड डे मील के भोजन में गड़बड़ी सामने आती है. बच्चों को कभी पौष्टिक खाना नहीं दिया जाता. साथ ही खाने में स्वच्छता का ध्यान नहीं रखा जाता. कुछ ऐसी ही घटना बिहार के गया जिले से सामने आई है.

    अचानक छात्राओं के बेहोश होने की वजह से मची अफरा-तफरी

    जहां गया के कस्तूरबा गांधी विद्यालय में मिड डे मील के खाने में छिपकली पाया गया. और यही खाना स्कूल के सभी छात्राओं को खिला दिया गया. जिसके बाद सारी छात्राएं बेहोश होने लगी. धीरे-धीरे उनकी तबीयत बिगड़ने लगी. जिसको देखकर स्कूल में अफरा तफरी का माहौल बन गया. किसी को कुछ समझ ही नहीं आ रहा था आखिर एक साथ सभी छात्राओं के बेहोश होने का कारण क्या है. छात्राओं की स्थिति को देखते हुए सभी को डुमरिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के लिए भर्ती कराया गया. जहां सभी छात्राओं का इलाज चल रहा है.

    आधा खाना खाने के बाद सब्जी में मिली मरी हुई छिपकली

    आपको बता दें कि छात्राओं के अनुसार मिड डे मील के खाने में छिपकली गिरी हुई थी. लेकिन इस बात को जानने के बावजूद सभी छात्राओं को लापरवाही से उस खाने को खिलाया गया. इस मामले पर कस्तूरबा गांधी स्कूल की एक छात्रा छोटी कुमारी ने बताया कि सुबह करीब 6:30 भोजन के लिए सभी बैठे थे तभी आधा खाना खाने के बाद उन्होंने सब्जी में छिपकली मरा हुआ पाया.

     सभी छात्राएं खतरे से बाहर

    वही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ धर्मवीर कुमार ने बताया कि सभी बच्चों का इलाज और जांच कर दी गई है.सभी बच्चे स्वस्थ हैं. वही 13 बच्चों को डॉक्टर की निगरानी में इलाज किया जा रहा है. इसके साथ ही मेडिकल की टीम विद्यालय में रहकर कैंप कर रही है.

    बच्चों के खाने में छिपकली मिलना नई बात नहीं

    बता दें कि मिड डे मील में छिपकली मिलने की घटना कोई नई नहीं है. इससे पहले भी देश के अलग-अलग राज्यों से इस तरह की लापरवाही की खबर सबके सामने आती रहती है.लेकिन विद्यालय प्रशासन इसको लेकर गंभीर नहीं होता. और बच्चों की जान से लगातार खिलवाड़ किया जाता है. गनीमत रही कि किसी भी छात्रा को कुछ नहीं हुआ. यदि इसकी वजह से किसी छात्रा की जान चली जाती, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती है.

    केंद्र सरकार बनाएं कड़े कानून

    जरूरत है कि अब भी सरकार की ओर से कोई कड़ा नियम लागू किया जाए. ताकि स्कूल प्रबंधन इस तरह की लापरवाही करने से पहले और बच्चों की जान से खेलने से पहले सौ बार सोचे.


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