छात्राओं ने खोली सरकारी विद्यालय की पोल, मिल रहीं है उन्हें धमकियां, जानिए पूरा मामला

    छात्राओं ने खोली सरकारी विद्यालय की पोल, मिल रहीं है उन्हें धमकियां, जानिए पूरा मामला

    बक्सर (BUXER): इन दिनों  विद्यालयों की व्यवस्था को लेकर तरह तरह के मामले सुर्खियों में हैं. बक्सर जिले में शिक्षा विभाग द्वारा सरकारी स्कूल की कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आई है जिसे देखकर हर कोई सोचने पर मजबूर हो जायेगा. कहने को तो यह स्कूल है जहां बच्चे पढ़ने जाते हैं. मगर इस स्कूल में ना बच्चों को पढ़ाया जा रहा है और ना ही उन्हें किताबें उपलब्ध कराई जा रही है.  यदि छात्राएं अपने हक की मांग को लेकर खड़ा होता है तो उसे धमकी दी जाती है. धमकी के तौर पर बच्चों के कहा जाता है कि उन्हें विद्यालय से निकाल दिया जाएगा. इस विद्यालय की बच्चियों ने अपने शिक्षा का हाल सुनाया है जिसने उन्होंने 6 महीने से लगातार  शिक्षा के नाम पर मजाक हो रहे सच को सबके सामने रखा है.

    सुनिए छात्राओं की आपबीती

    इस वायरल वीडियो में आप साफ़ सुन सकते हैं कि कैसे विद्यालय की बच्चियां शिक्षा की बता रही हैं. छात्राओं का कहना है कि पिछले 6 महीने से उन्हें पढ़ाया जा रहा है और ना उन्हें किताबें उपलब्ध कराए जा रहे हैं. अब विद्यालय में परीक्षा भी होने वाली है ऐसे में छात्राओं का कहना है कि बिना पढ़ाई के वह परीक्षा कैसे देंगे. साथ ही साथ उन्होंने यह भी बताया कि कैसे जब वह इसकी मांग करती है तो उल्टा उन्हें प्रिंसिपल की ओर से धमकियां मिलती है. एक छात्रा ने बताया कि जब उसने इस बात की कंप्लेंट की तो उसे डांट डांट कर उसे रुला दिया गया वहीं अन्य छात्रा ने बताया कि उसी नाम पटवा देने की धमकी दी गई. ऐसी नहीं अभी बड़ा सवाल उठता है कि क्या सरकार में विद्यालय की हालत को कोई देखने वाला है कि नहीं जिन विद्यालयों के ऊपर छोटे-छोटे ग्रामीण क्षेत्रों के लोग आश्रित रहते हैं . जहां उनके लिए एक ही मात्र जरिया होता है कि वह अपनी शिक्षा पूरी करें ऐसे में जब शिक्षा विभाग की ऐसी दशा रहेगी तो बच्चों के भविष्य का क्या होगा.

    प्रधानाध्यापक नहीं उठा रही है फोन

    वह इस मामले के संज्ञान में आते ही स्कूल के प्रधानाध्यापक आभा देवी को फोन लगाया जा रहा है मगर अब हे देवी फोन उठाना मुनासिब नहीं समझ रही है. छात्राओं द्वारा लगाए गए तमाम इंसानों का जवाब देने के लिए वह सामने नहीं आ रही है जिससे उनका विचार जाना जा सके. अब ऐसे में देखना यह है कि क्या वीडियो शिक्षा विभाग के उन लोगों तक पहुंचती है जो दावा करते हैं कि सरकारी विद्यालयों की स्थिति पहले से बेहतर है.


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