सीतामढ़ी में CO और दरोग़ा के बीच मारपीट, बौखलाए दरोगा ने सीओ मोनी कुमारी को हाजत में किया बंद, अब मचा बवाल, देखिए VIDEO   

    सीतामढ़ी में CO और दरोग़ा के बीच मारपीट, बौखलाए दरोगा ने सीओ मोनी कुमारी को हाजत में किया बंद, अब मचा बवाल, देखिए VIDEO   

    टीएनपी डेस्क: बिहार के सीतामढ़ी से एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है. वायरल वीडियो में बिहार के सीतामढ़ी की CO रोती हुई नजर आ रही है और सिपाही से दरवाजा खोलने की गुहार लगा रही है. वायरल वीडियो में देखा जा रहा है कि को मोनी कुमारी बार-बार थाना प्रभारी पूनम कुमारी से गेट खोलने की गुहार लगा रही है लेकिन थाना प्रभारी गेट खोलने के बजाय यह कहती हुई नजर आ रही है कि वह गेट नहीं खोलेगी क्योंकि उसे ऊपर से आर्डर आया है. अब यह सवाल उठता है कि यह पूरा मामला आखिर है क्या? आईए जानते हैं विस्तार से 

    बिहार के सीतामढ़ी में 30 नवम्बर को शराब नष्ट करने के दौरान सीतामढ़ी सीईओ मोनी कुमारी और थाना प्रभारी राजकुमार गौतम के बीच बहसबाजी शुरू हुई थी जो बाद में हाथापाई में बदल गई थी. इसका वीडियो भी सोशल भी मीडिया पर वायरल हुआ था. वायरल वीडियो में देखा गया था कि थाना प्रभारी ने महिला CO को थप्पड़ मार दिया था जिसके बाद सीओ ने थाना प्रभारी को चप्पलों से पीटा था. इस घटना के बाद डीएम रिची पांडे और एसपी मनोज कुमार तिवारी ने मौके पर पहुंचकर मामले को शांत करवाया था लेकिन अब इस मामले में एक नया मोड़ सामने आया है. यह मामला अब बिहार में तूल पकड़ता हुआ नजर आ रहा है

    शनिवार 7 नवम्बर को सोशल मीडिया पर एक और वीडियो वायरल हुआ जिसमें सीओ मोनी कुमारी थाने के अंदर नजर आई. वीडियो में वह रोती हुई दिखाई दे रही है. दावा किया जा रहा है कि थाना प्रभारी के आदेश पर CO मोनी कुमारी को थाना में बंद किया गया. इस वीडियो के सामने आने के बाद मामला काफी गर्म हो गया. बिहार CO संघ ने घटना पर नाराजगी जताते हुए थाना प्रभारी राजकुमार गौतम पर तत्काल कार्रवाई करने की मांग कर दी. संघ ने कहा कि जब तक दोषी थाना प्रभारी पर कार्रवाई नहीं की जाएगी तब तक कोई भी सीओ भूमि विवाद से जुड़े मामले में जनता दरबार में शामिल नहीं होगा. इसके बाद डीएम और एसपी रेस हुए और मामले की जांच के आदेश का आश्वासन दिया. प्रशासन का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच सुलह कराने की कोशिश कर की जा रही है. लेकिन अब वीडियो वायरल के बाद कारवाई की जाएगी. बिहार के सीईओ संघ और प्रशासनिक अधिकारी इस मुद्दे पर अपनी अपनी राय दे रहे हैं. उनका कहना है कि यह काफी गंभीर मुद्दा है और यह राज्य में प्रशासनिक कार्यों को भी प्रभावित कर रहा है. ऐसे में अब बड़े अधिकारियों ने दोषी पर कार्रवाई करने की बात कही है.

    वहीं इस मामले में लोगों का कहना है कि थाना प्रभारी का काम क़ानूनी रूप से व्यवस्था को ठीक करना है ना कि ख़ुद की क़ानून व्यवस्था बिगाड़ने का.


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